
गुरु नानक साहिब फरमाते है:
- जैसे जल मह कमल निरालम मुरगाई नै साने।।
- सुरत सबद भाव सागर तरिए नानक नाम वाखने।।
जिस तरह मुरगाबी पानी में रहती है, जब चाहती है, सूखे परो से उड़ जाती है। कमल का फूल पानी से बाहर होता है, जड़े पानी में होती है। इसी तरह हमे भी अपनी आत्मा को शब्द या नाम से जोड़कर इस भवसागर से पार हो जाना है। दुनिया में रहते हुए भी दुनिया के मैल में नहीं लीबड़ना हैं।
जो भेखि लोग है, वे बेटे बेटियों को त्यागकर जंगलों पहाड़ों में छिप जाते है। भगवे, पीले, नीले कपड़े पहन लेते है। वहा झोपड़ियों बनाकर बैठ जाते है। गुरु साहिब कहते है कि इसका क्या फायदा है? उनके मन में वही इच्छाएं, वही तृष्णाए है जिन्हे वे अंदर दबाए रखते ही। वहा रहने का क्या फायदा? उन्हें हर चीज वहा भी चाहिए।
हम देखे, हमे दुनिया में किस चीज की जरूरत है? हमारे पेट को खाने की जरूरत है, शरीर ढकने के लिए हमे कपड़े की जरूरत है, सिर पर किसी छत कि जरूरत है। क्या जंगलों पहाड़ों में जाकर हमारा पेट खाना नहीं मांगता? जंगलों पहाड़ों में जाकर हमे कपड़े की जरूरत नहीं पड़ती? अपनी है हलाल की कमाई छोड़ी, बाल बच्चों का खाना छोड़ा, लोगो के आगे हाथ फैला फैलाकर, मांगकर पेट भरना पड़ा। पेट ने तो वहां भी लिहाज नहीं किया। वहा जाकर मांगना शुरू कर दिया। सफ़ेद कपड़े उतारकर भगवें पहन लिए, तन को फिर भी ढकना पड़ता है। अपने घर का सुख, आराम छोड़ेगे, कोई आश्रम ढूंढेंगे, मंदिर, गुरुद्वारा ढूंढेंगे, झोपड़ी बनायेगे, गुफा बनाएंगे, सिर पर तो फिर भी छत की जरूरत पड़ती है। छूटती कोन से चीज है? उलटा अपाहिज होकर बैठ जाते हैं।
गुरुबाणी में आता है आदि ग्रंथ पृष्ठ स १४२१
- जोग न भगवी कपड़े,जोग न मैले वैस।।
- नानक घर बैठेया जुगत पाइए, सतगुरु के उपदेश।।
ना तो जोग यानी सच्ची भक्ति भगवे कपड़े को पहनने से आती है और ना ही परमात्मा का मैले कपड़े पहनने से पाया जा सकता है यानी कई कई दिनों तक न नहाना पसंद है। महात्मा समझाते है कि अगर परमात्मा कि दया से पूरा सतगुरु मिले और जब हम उनके उपदेश पर चले तो घर में बैठकर ही प्रभु को पा सकते है।
महात्मा यह नहीं कहते कि बेटे बेटियों को त्यागकर, जंगलों पहाड़ों में छिपकर बैठ जाओ। दुनिया में रहना है, सुरमे बहादुर बनकर रहना है और दुनिया में रहते हुए भी दुनिया कि मैलो में नहीं लीबड़ना है।
बहुत सुंदर विश्लेषण !!
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आपके विश्लेषण भी हमारा मनोबल बढ़ाते है। धन्यवाद
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🙏🙏😊😊🙏🙏 आभार
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महात्मा समझाते है कि अगर परमात्मा कि दया से पूरा सतगुरु मिले और जब हम उनके उपदेश पर चले तो घर में बैठकर ही प्रभु को पा सकते है।
If only we all would understand this then there wouldn’t be so much chaos based on religion.
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True
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