सबकुछ लौटकर वापिस आता है

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

6 thoughts on “सबकुछ लौटकर वापिस आता है

  1. पाप परिभाषित आज करे यहां
    कहते किसको पाप यहां
    दिल दुखाए जो कभी किसी का
    उस से बड़ा ना पाप यहां।।

    पाप धुलते समय अनुसार
    हर पाप की काट हैं एक यहां
    पाप की काट होती तड़प
    दिल तड़पे पाप कटे यहां।।

    रूप परिवर्तित होता पाप का
    दिल तड़पता जब यहां
    समझने वाले ही समझ सकते
    पाप कक्त रहे अब यहां।।

    चाहे खुदा की तड़प हो या
    हो महबूब की वो यहां
    तड़प तब तक ना जाती जब तक
    पाप पुण्य में ना बदले यहां।।

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      1. फोन टूट गया था सर जी
        इसलिये लेट हो गए थे

        सही रहो पर चल रहे थे
        बादलो ने अँधेरा कर दिया
        वर्षा ने भी रुकावट की कोशिश की
        पर आपकी कशिश ने हर रुकावट को रौंद दिया

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