असली सूरमा या बहादुर

स्वामी जी महाराज की बाणी में आता है।

सारबचन संग्रह (19:2:7-11)

जिन्होने मार मन डाला। उन्हीं को सूरमा कहना।।

बड़ा बेरी यह मन घट में। इसी का जीतना कठिना।।

पड़ो तुम इस ही के पीछे। और सबहि जतन तजना।।

गुरु की प्रीत कर पहिले। बहुर घट शब्द को सुनना।।

मान दो बात यह मेरी। करे मत और कुछ जतना।।

संत महात्मा उसी को बहादुर या सूरमा कहते है जिन्होंने मन को मार दिया। “मन जीते जग जीत।” यानि जिसने मन को जीत लिया उसी ने सारे संसार को जीत लिया। क्यो कि यही बेरी यानी दुश्मन है हमारा इसी को जीतना कठिन है। जब तक इस के पीछे नहीं लगते ये हमको गलत कामों में लगाए रखता है। परमात्मा की भक्ति से मन दूर दूर भागता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार इसके मुख्य हथियार है। इसको मारने के लिए पहला साधन गुरु से प्रेम है और दूसरा गुरु के बताएं तरीके से शब्द या नाम (divine Music) को अपने अंतर में सुनना है। यही दो साधनों के अलावा जितने भी साधन है वो सिर्फ कुछ समय के लिए है। इसके अलावा कोई जतन नहीं हैं।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

4 thoughts on “असली सूरमा या बहादुर

      1. इंतजार
        Wow

        अनजान दोस्त

        क्यो मिलाना चाहते दिल से दिल
        क्यो बेकरारी दिखलाते यहा
        हम लिखते कारक शब्दार्थ
        आप कारण लिखते सदा यहा।।

        आप कहते वाणी जग में
        राह सत्य की दिखलाओ यहा
        हम कहते धरा चल दिखाओ
        सत्य राह पर चल दिखाओ यहा।।

        मंजिल दिनों की एक दिखी
        राहे जुदा अपनी यहा
        दोनो हम दोनों यहा हैं
        पुजारी सत्य के दोनों यहा।।

        भक्ति बड़ी होती सदा
        शक्ति भक्ति पीछे यहा
        मंजिल तलाशनी दोनो को सत्य की
        तपस्या कर रहे दोनो यहां।।

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