आदि ग्रंथ में गुरु अर्जुन देवजी ने फरमाया है:
कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ।। कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ।। कारण करण करीम । किरपा धारि रहीम ॥ कोई नावै तीरथि कोई हज जाइ ।। कोई करै पूजा कोई सिरु निवाइ ॥ कोई प . बेद कोई कतेब । कोई ओढे नील कोई सुपेद ॥ कोई कहै तुरकु कोई कहै हिंदू ॥ कोई बाछै भिसतु कोई सुरगिंदू ॥ कहु नानक जिनि हुकमु पछाता ॥ प्रभ साहिब का तिनि भेदु जाता । आदि ग्रन्थ , पृ .885
गुरु अर्जुन साहिब फ़रमाते हैं , चाहे कोई राम कहे या ख़ुदा , गोसाईं को पूजे या अल्लाह को , ‘ करन कारन करीम ‘ वह एक ही है । वह कृपालु सब पर समान रूप से कृपा कर रहा है , चाहे कोई तीर्थों में नहाये या हज को जाये , पूजा करे या सिर झुकाये , वेदों को पढ़े या अन्य धर्म – पुस्तकों का पाठ करे , नीले कपड़े पहने या सफ़ेद बाना , तुर्क कहलाये या हिन्दू , बिहिश्तों की लालसा करे या स्वर्गों की । इन सबमें जो मालिक के हुक्म (divine power) को पहचानता है , वही मालिक के भेद को पा सकता है।
(पढ़ने के दौरान जो भी अच्छे पद, वाणी या कलाम मिलता है वहीं मै आपके साथ बाटता हूं। जिससे हम सब को फायदा मिलता है इन पदों को पढ़ने के बाद यह लगता है कि हमारी छोटी सोच ने परमात्मा तक को बाट दिया है उनकी असली पहचान उसका हुक्म है। यह तक हम भूल गए है। )
Bilkul sahi.
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