
लोगन राम खिलौना जाना (संत कबीर की बाणी)
माथे तिलक हथ माला बानां ॥ लोगन राम खिलउना जानां ॥ जउ हउ बउरा तउ राम तोरा ॥ लोग मरम कह जानै मोरा ॥ तोरउ न पाती पूजउ न देवा ॥ राम भगति बिन निहफल सेवा ॥ सतगुर पूजउ सदा सदा मनावउ ॥ ऐसी सेव दरगह सुख पावउ ॥ लोग कहै कबीर बउराना ॥ कबीर का मरम राम पहिचानां ॥
लोग माथे पर तिलक , हाथ में माला और शरीर पर लाल , पीले , नील , सफ़ेद आदि रंगों में से किसी एक रंग का चोला धारण कर लेते हैं । वे फूलों , पत्तियों आदि के द्वारा भाँति – भाँति की पूजा करते हैं । कबीर साहिब कहते हैं कि इस तरह के तमाशे करनेवाले लोगों ने प्रभु को खिलौना समझ लिया है परंतु सच्ची भक्ति के बिना सब सेवा व्यर्थ है । मैं तो सतगुरु की पूजा करता हूँ और उन्हीं को प्रसन्न करने का प्रयत्न करता हूँ । ऐसी सेवा से ही प्रभु की दरगाह में मान प्राप्त होता है । लोग कहते हैं कि कबीर पागल हो गया है परंतु कबीर की आंतरिक अवस्था का भेद केवल प्रभु ही जानता है ।
मनावउ= प्रसन्न करना , बउरा= बावला