गड़रिये की भेंट

वे लोग धन्य हैं जिनका मन पवित्र है , क्योंकि केवल उन लोगों को ही प्रभु का दीदार हासिल होगा । सेंट मैथ्यू

मनुष्य के अंदर दो बड़े गुण हैं । एक भय और दूसरा भाव यानी डर और प्यार । जिसको परमात्मा का डर है , उसको परमात्मा से प्यार भी है । जिसको परमात्मा से प्यार है , उसको परमात्मा का डर भी है ।

कहा जाता है कि एक दिन एक बकरियाँ चरानेवाला गड़रिया मालिक के प्यार में आकर कहने लगा , ‘ हे परमात्मा , अगर तू मुझे मिले तो मैं तुझे दूध पिलाऊँगा , मक्खन खिलाऊँगा , लेलों ( मेमनों ) की ऊन का कंबल बनाकर पहनाऊँगा । ‘ इस तरह बहुत कुछ कहता रहा । अभी वह अपनी बात खत्म कर ही रहा था कि इत्तफ़ाक़ से वहाँ एक फ़क़ीर आ गया । उसको चरवाहे की बात बहुत बुरी लगी । उसने उस ग़रीब चरवाहे से कहा , ‘ क्या बकवास कर रहे हो ? यह सब मूल् वाली बातें हैं । । तुम ने बहुत बड़ा गुनाह किया है । ‘ चरवाहे ने हैरानी से पूछा , ‘ क्या गुनाह ? क्यों हज़रत ! मेरी ख़ुदा के आगे की हुई यह साधारण – सी विनती गुनाह कैसे हो सकती है ? ‘

फ़क़ीर ने कहा , ‘ ज़रा सोच , तू क्या कह रहा था । तूने सचमुच ख़ुदा की निंदा करके गुनाह किया है । ‘ उसने गड़रिये से कहा कि परमात्मा न दूध पीता है न मक्खन खाता है और न ही कंबल ओढ़ता है । गड़रिये ने पूछा , ‘ तो क्या मैंने गुनाह किया है ? ‘ फ़क़ीर ने कहा कि हाँ ।

फ़क़ीर तो अपनी बात कहकर चला गया , बाद में गड़रिया पछतावे में आकर बहुत रोया और कहने लगा , ‘ परमात्मा , मैंने गुनाह किया है , तू मुझे बख़्श दे । ‘ रोते – रोते उसका परदा खुल गया । परमात्मा ने दर्शन दे दिये । वह कहीं दूर तो था नहीं , उसके अंदर ही था । परमात्मा ने कहा , ‘ तू घबरा मत । मैं तेरा मक्खन भी खाऊँगा , दूध भी पीऊँगा और कंबल भी ओढूँगा । ‘ उधर फ़क़ीर पर परमात्मा की नाराज़गी ज़ाहिर हुई । परमात्मा ने कहा , ‘ तूने मेरे एक प्यारे का दिल दुखाया है , जा उससे माफ़ी माँग । ‘ फ़क़ीर गड़रिये के पास आया और कहने लगा , ‘ मुझे माफ़ी दे दे , मैंने ग़लती की है । ‘ गड़रिया हँसकर बोला , ‘ भाई , जो परमात्मा तेरे पास आया है , वह मेरे पास भी आ गया है । ‘

सो जिसको प्रभु से प्यार है , उसे प्रभु का भय भी है । हम एक दूसरे की निंदा करते हैं क्योंकि हमें मालिक का डर और प्यार नहीं । हमारे अंदर उसका डर और प्यार होना चाहिए । अगर मालिक से मिलना है तो गुरु के पास जाकर नाम की कमाई करनी होगी , फिर वह दया करके हमारे अंदर भय और भाव पैदा कर देगा ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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