मेरे संपूर्ण पवित्र पर्वत पर न वे किसी को चोट पहुँचायेंगे नष्ट करेंगे , क्योंकि धरती यहोवा ( प्रभु ) के ज्ञान से भरपूर रहेगी जैसे समुद्र पानी से भरा रहता है ।इसायाह
जब हज़रत जुनैद बग़दादी क़ाबा को जा रहा था तो उसने रास्ते में एक कुत्ते को देखा , जो ज़ख़्मी हालत में पड़ा था । उसके चारों पाँव पर से गाड़ी गुज़र गयी थी और वह चल नहीं सकता था । फ़क़ीर को रहम आया , लेकिन सोचा कि मैं तो क़ाबे को जा रहा हूँ इसको कहाँ लिए फिरूँगा , दूसरे यह पलीत जानवर है । फिर ख़याल आया कि यहाँ इसका कौन है ? में दया आ गयी । कुत्ते को किसी कुएँ पर ले जाने के लिए उसे उठा लिया , ताकि पानी से उसके ज़ख़्मों को धोकर उस पर पट्टी कर दे । उसने इस बात की कोई चिंता न की कि कुत्ते के ज़ख़्मों से बहते से उसके कपड़े ख़राब हो जायेंगे ।
उस समय वह एक रेगिस्तान से गुज़र रहा था । जब वह नखलिस्तान पहुँचा तो वहाँ उसने एक वीरान कुआँ देखा । परंतु उसके पास कुएँ से पानी निकालने के लिए कोई रस्सी और डोल वगैरा नहीं थे , उसने दो – चार पत्ते इकट्ठे करके एक दोना बनाया । पगड़ी से बाँधकर उसे कुएँ में लटकाया । पानी नीचे था , दोना वहाँ तक पहुँच न सका । साथ में क़मीज़ बाँध ली , लेकिन दोना फिर भी पानी की सतह तक न पहुँचा । इधर – उधर देखा , कोई नज़र नहीं आया । फिर सलवार उतारकर साथ बाँधी । तब पानी तक दोना पहुँचा । दो – चार दोने पानी निकालकर पिलाया । कुत्ते को होश आ गया और उसने कुत्ते के ज़ख़्मों को साफ़ किया और उन पर पट्टी बाँधी । वह कुत्ते को उठाकर चल पड़ा । रास्ते में एक मसजिद थी ।उसने मुल्ला से कहा कि तुम इस कुत्ते का ख़याल रखना , मैं क़ाबे को जा रहा हूँ । आकर ले लूँगा । जब रात को सोया तो बशारत ( आकाशवाणी ) हुई कि तूने मेरे एक जीव की रक्षा की है , तेरा हज्ज कुबूल है । अब चाहे हज पर जा या न जा , तेरी मरज़ी है ।
सो बेज़बान पर तरस करना बहुत ऊँची गति की बात है ।