घर में झगड़ा- कबीर साहिब

कबीर कहते हैं कि मनुष्य – शरीर एक घर के समान है जिसमें घर का मालिक सुख और चैन नहीं पाता क्योंकि घरवाले आपस में झगड़ते रहते हैं । घरवालों में हैं पाँच लड़के ( पाँच इन्द्रियाँ ) और पत्नी दुर्मति ( मन की दूषित प्रवृत्तियाँ ) । प्रत्येक इन्द्रिय अपनी इच्छा की पूर्ति के लिये जीव को अलग – अलग दिशा में खींचती है और दुर्मति उसे संसार के पदार्थों की ओर ले जाती है । जो व्यक्ति पाँचों इन्द्रियों तथा दुर्मति को वश में करके शरीररूपी घर में शान्ति स्थापित कर लेता है , वह सच्चे ज्ञान को प्राप्त करके अपना मनुष्य – जन्म सफल कर लेता है ।

संतो घर में झगरा भारी । राति दिवस मिलि उठि उठि लागैं , पाँच ढोटा ‘ एक नारी ॥ – न्यारो न्यारो भोजन चाहें , पाँचो अधिक सवादी । कोउ काहु को हटा न माने , आपुहि आप मुरादी ॥दुर्मति केर दोहागिन ‘ मेटो , ढोटेहि चाप चपेरे । कहैं कबीर सोई जन मेरा , जो घर की रारि निवेरे ‘ । बीजक , पृ .31

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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