कष्ट , पीड़ा , दुःख और रोग हमारी खूब सफ़ाई करते हैं । वे हमें बेहतर इनसान बनाते हैं और परमात्मा के नज़दीक ले आते हैं । भगवान कृष्ण ( भागवत में ) उद्धव से कहते हैं , ‘ मैं अपने सबसे प्यारे भक्तों को तीन दुर्लभ उपहार या सौगातें देता हूँ । वे हैं -1 . ग़रीबी , 2. बीमारी और 3. निरादर । ‘ ईसा मसीह ने सच ही कहा है कि किसी अमीर आदमी के परमात्मा के देश में प्रवेश पाने से ऊँट का सूई के नाके ( छेद ) में से निकल जाना कहीं आसान है । भगवान कृष्ण ने शरीर के प्यार , शेख़ी , घमंड और सांसारिक पदार्थों के मोह को परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग में रोड़े बतलाया है ।