सत्संग की सच्ची ख्वाइश का फल

पाकिस्तान में कालाबाग में अक्सर हुजूर बड़े महाराज (सतगुरु) सत्संग देने जाते थे। कालाबाग के पास एक गांव में एक बुजुर्ग महिला जिसकी उम्र अस्सी साल से ऊपर थी को भी पता चला कि ब्यास वाले संत कालाबाग में सत्संग देने आने वाले हैं। उस बुजुर्ग महिला ने अपने लड़के से कहा कि तुम मुझे कालाबाग ले चलो वहां मैंने ब्यास वाले संत के दर्शन करने हैं और उनसे नाम दान भी लेना है।

लड़के ने कहा कि माता जी तुम्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही है, इसलिए वहां जाकर तकलीफ़ हुई तो परेशानी हो सकती है। माता जी ने बहुत हठ किया। खैर लड़के ने अपनी बैलगाड़ी में एक बिस्तर लगाया, उस पर माता जी को लिटाया और कालाबाग की ओर चल पड़ा। रास्ते में माता जी का सांस उखड़ गया और उनकी मौत हो गई। लड़का बड़ा परेशान हुआ। खैर उसने बैलगाड़ी वापिस अपने गांव की तरफ मोड़ ली।

उधर कालाबाग में हुजूर बड़े महाराज जी सत्संग कर रहे थे। सत्संग के दौरान उन्होंने सारी संगत को कहा की आप सब लोग दस मिनट के लिए ध्यान में बैठो। हुजूर बड़े महाराज जी भी ध्यान में बैठे गये। जब सत्संग समाप्त हो गया और हुजूर अपने विश्राम गृह में चले गए तो वहां के कुछ प्रमुख लोग हुजूर के पास विश्राम गृह में आए और कहने लगे कि आप ने दस मिनट के लिए सत्संग क्यों बंद किया था।

हुजूर बड़े महाराज जी ने टाल दिया। परन्तु वह लोग न मानें और ज़िद करने लगे। हुजूर बड़े महाराज जी ने फ़रमाया कि आपके पास ही एक गांव में एक बुजुर्ग महिला जो हमारे सत्संग में बड़े प्रेम और सच्चे मन से आ रही थी, उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। धरमराय ने अपने यमदूत उसे लेने भेजे थे परन्तु क्योंकि उसकी सत्संग सुनने और नाम दान लेने की प्रबल इच्छा थी, इसलिए हमें उसे बचाने वहां जाना पड़ा।

यमदूत कह रहे थे कि यह हमारा जीवन है, तो हुजूर कहने लगे कि मैंने कहा कि आप इसके घर से सत्संग वाले स्थान तक कदम गिन लो यदि आपके कदम ज्यादा बनते हों तो ले जाना नहीं तो मैं ले जाऊंगा। हुजूर ने फ़रमाया कि जब मैंने संगत को दस मिनट के लिए ध्यान में बिठाया तो कदमों की पैमायश चल रही थी। सत्संग की तरफ बीस कदम ज्यादा निकले, इसलिए माता को ले जाने के लिए मुझे जाना पड़ा, हालांकि माता को केवल सत्संग व नाम दान की ख्वाहिश ही थी।

सोचो जो सत्गुरु केवल सच्ची ख्वाहिश पर ही जीवों का उद्धार करता है, वह हमें भी अपनी चरण शरण में ले कर एक दिन जरूर सचखंड का निवासी बनाएगा।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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