परमात्मा कहा है?

मनुष्य के सामने यह सवाल हमेशा से रहा है कि परमात्मा वास्तव में है भी या नहीं। यदि है तो उससे मिलाप कैसे हो सकता है।इस विषय पर कई ग्रंथ पोथियां लिखी गई, पर इसका सही जवाब वक्त के पूर्ण संत सतगुरु जी दे सकते है क्यो कि वे परमात्मा से मिलाप कर चुके होतेContinue reading “परमात्मा कहा है?”

जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

पाठ आध्यात्म की नजर से

अक्सर देखने को मिलता है कि साधारण व्यक्ति ही नहीं, ग्रंथो शास्त्रों के ज्ञाता, महान विद्वान और प्रवक्ता भी इन शास्त्रों की खूब जोर शोर से व्याख्या करते है, परन्तु उनका अपना जीवन शास्त्रों में दिए उपदेश से बिल्कुल उलट होता है। संतो महात्माओं ने इस प्रकार के पाठ विचार करने वालों को चंड़ुल पक्षीContinue reading “पाठ आध्यात्म की नजर से”

निंदा आध्यात्म की नजर से..

गुरु अर्जुन देव जी (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ३१५) फरमाते है: अवखध सभे कितीअन, निंदक का दारू नाहि ।। सब किए की माफ़ी है पर निंदा रूपी अपराध की माफ़ी बहुत मुश्किल है। संत मत में रूहानी तरक्की के लिए अवगुणों का त्याग करने और गुणों को धारण करने का उपदेश दिया जाता है। परमार्थीContinue reading “निंदा आध्यात्म की नजर से..”

गुरु और गोविंद एक ही है

गुरु और गोविंद एक ही है संत दादू दयाल जी फरमाते है: जहां राम तह संत जन, जह साधू तह राम। दादू दून्यू एकठे, अरस परस बिश्राम।। सच्चे संत परमात्मा में मिलकर परमात्मा रूप हो चुके होते है। अतः परमात्मा कि प्राप्ति संतो द्वारा है हो सकती है और संत परमात्मा की कृपा से हीContinue reading “गुरु और गोविंद एक ही है”

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