!! नेत्रहीन संत !!

एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा। नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहलेContinue reading “!! नेत्रहीन संत !!”

रामायण

रामायण…‘रा’ का अर्थ है प्रकाश, ‘मा’ का अर्थ है मेरे भीतर, यानी रामा का अर्थ है मेरे भीतर का प्रकाश। दशरथ और कौसल्या ने राम का जन्म दिया। दशरथ का अर्थ है 10 रथ। दस रथ 5 इन्द्रिय अंगों (ज्ञानेंद्रिय) और 5 क्रिया अंगों (कर्मेन्द्रिय) के प्रतीक हैं। कौशल्या का अर्थ है कौशल। 10 रथोंContinue reading “रामायण”

परमात्मा कहा है?

गुरु नानक देव जी की वाणी है :  हर मंदर सोई आखीऐ जिथहो हर जाता ॥ मानस देह गुर बचनी पाइआ सभ आतम राम पछाता ॥ बाहर मूल न खोजीऐ घर माहे बिधाता ॥ मनमुख हर मंदर की सार न जाणनी तिनी जनम गवाता ॥ (आदि ग्रंथ पेज न 953) अर्थात् उस स्थान को हीContinue reading “परमात्मा कहा है?”

ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार

उपनिषदों के अनुसार जप – तप , दान – पुण्य और धर्मग्रंथों के पठन – पाठन में परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती । उसे केवल ध्यान – साधना द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त किया जा सकता है । न चक्षुधा गृहाते नापि वाचा नान्यैर्देवैः तपसा कर्मणा वा । ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्त्वः ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानःContinue reading “ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार”

जीवित गुरु की आवश्यकता

1. गुरु और गोविन्द एक ही हैं सच्चे सन्त परमात्मा में मिलकर परमात्मा रूप हो चुके होते हैं । अत : परमात्मा की प्राप्ति सन्तों द्वारा ही हो सकती है और सन्त परमात्मा की कृपा से ही मिलते हैं । स्वयं भगवान् का यह कहना है कि जिस तरह दूध में मिलकर पानी और जलContinue reading “जीवित गुरु की आवश्यकता”

मानव जीवन का उद्देश्य

परमात्मा की प्राप्ति (संत दादू दयाल जी …….) परमात्मा की प्राप्ति मनुष्य – जन्म में ही सम्भव है । मानव शरीर धारण करके ही हम परमात्मा के सच्चे नाम की नौका पर चढ़कर इस विशाल भवसागर को पार कर सकते हैं । मानव शरीर को परमात्मा का मन्दिर , नर – नारायणी देह या मुक्तिContinue reading “मानव जीवन का उद्देश्य”

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