सेवा से फायदा ही फायदा है।

मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”

तू सच में बहुत दयालु हैं!

एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शनContinue reading “तू सच में बहुत दयालु हैं!”

राम कहा हैं?

चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”

करना क्या है? कर क्या रहे है?

धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”

🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️

संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️”

ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार

उपनिषदों के अनुसार जप – तप , दान – पुण्य और धर्मग्रंथों के पठन – पाठन में परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती । उसे केवल ध्यान – साधना द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त किया जा सकता है । न चक्षुधा गृहाते नापि वाचा नान्यैर्देवैः तपसा कर्मणा वा । ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्त्वः ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानःContinue reading “ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार”

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