ऐसे प्रेमी , सतगुरु के प्रेम और मुहब्बत में फ़ना होकर ( अपने आप को पूर्णतया खोकर ) अमर जीवन का रस पीते हैं और उसका आनंद प्राप्त करते हैं । महाराज सावन सिंह एक बार जब कृष्ण जी विदुर के घर गये , उस समय वह घर पर नहीं थे । उनकी पत्नी नहाContinue reading “प्रेम की मस्ती”
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लफ़्ज़ों का फेर
गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज ने ‘ जाय साहिब ‘ में मालिक के हजार से अधिक नाम बताये हैं । पर वे केवल नामों के तात्पर्य को ग्रहण करने का आदेश देते हैं और कहते हैं कि तुम नामों से चलकर उस नामी को पकड़ो जो सबका इष्ट है । महाराज सावन सिंह चार अलगContinue reading “लफ़्ज़ों का फेर”
माँ की शिक्षा
अपने अंदर प्रियतम के सिवाय और कोई चाह न रखो । भक्त और भगवान के बीच किसी दूसरे का ख़याल तक बाक़ी न रहे । मौलाना रूम कहा जाता है कि जब प्राचीन भारत के एक राजा गोपीचंद ने दुनिया की ऐशो – इशरत से तंग आकर अपना राज्य छोड़ दिया और गोरखनाथ के पासContinue reading “माँ की शिक्षा”
गुरु रामदास और मिट्टी के चबूतरे
एक व्यक्ति हज़ार बार युद्ध में हज़ार लोगों को जीत लेता है , जब कि दूसरा व्यक्ति केवल अपने आप पर विजय प्राप्त करता है । वास्तव में दूसरा व्यक्ति ही सबसे बड़ा विजेता है । महात्मा बुद्ध जब तीसरे गुरु , गुरु अमरदास जी ने अपना उत्तराधिकारी चुनने का मन बनाया तो उनके शिष्योंContinue reading “गुरु रामदास और मिट्टी के चबूतरे”
मालिक सब देखता है
ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहाँ जाऊँ ? तेरी हुजूरी से भागकर कहाँ जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ , तू वहाँ भी मौजूद है । यदि पाताल में अपना डेरा तान लूँ तो तू वहाँ भी है ।129 साम्ज़ किसी महात्मा के पास दो आदमीContinue reading “मालिक सब देखता है”
संतों के सामने घमंड
होह सभना की रेणुका तउ आउ हमारे पास ॥131 गुरु अर्जुन देव शेख़ फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रूहानियत की गहरी लगन थी । उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था जो राजस्थान के एक शहर अजमेर में रहते थे । उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुँचे तो देखा किContinue reading “संतों के सामने घमंड”
मुर्दा खाने का हुक्म
अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”
इंद्र का तीर – कमान
जेती लहरि समंद की , तेते मनहिं मनोरथ मारि । बैसै सब संतोष करि , गहि आतम एक बिचारि।।56 संत दादू दयाल एक ऋषि ने इतनी तपस्या की कि स्वर्ग के राजा इंद्र को डर लगने लगा कि कहीं ऋषि उसका सिंहासन न छीन ले । वह हाथ में तीर – कमान लेकर शिकारी काContinue reading “इंद्र का तीर – कमान”
चोर से कुतुब
यदि खुश्क पत्थर या संगमरमर है तो कामिल फकीर की सोहबत में जाने पर तू हीरा बन जायेगा ।67 हजरत अब्दुल कादिर जीलानी फ़ारस देश के बहुत कमाई वाले महात्मा थे । मुसलमानों में फकीरों के दर्जे होते हैं – कुतुब , गौस आदि । किसी जगह मौलाना रूम का क्रुतुब मर गया था ।Continue reading “चोर से कुतुब”
महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच
साहिब के दरबार में केवल भक्ति पियार ॥ केवल भक्ति पियार साहिब भक्ती में राजी ।। पलटू साहिब महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच जब महाभारत की लड़ाई ख़त्म हुई तो भगवान कृष्ण ने पांडवों को बुलाकर कहा कि अश्वमेध यज्ञ कराओ , प्रायश्चित्त करो , नहीं तो नरकों में जाओगे । लेकिन तुम्हारा यज्ञ तबContinue reading “महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच”