प्रयास (efforts)

अपने हिस्से के लिए अपनी परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करें; लेकिन अपने प्रयासों के परिणामों को सतगुरु की इच्छा पर छोड़ दें। वह आपकी समस्याओं से अनजान नहीं है। -मास्टर जगत सिंह जी For your part make all necessary efforts to improve your circumstances; but leave the results of yourContinue reading “प्रयास (efforts)”

चौरासी लाख योनियों से मुक्ति

गुरू अर्जुन देव जी कहते है: लख चौरासी जोन सबाईं।। मानस कऊ प्रभ दी वडयाई।। इस पउड़ी ते जो नर चुके, सो आइ जाइ दुख पाईदा।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स १०७५) गुरू साहिब चेतावनी दे रहे है कि जो लोग प्रभु की अपार दया से मिले मनुष्य जन्म के अमूल्य अवसर को इन्द्रियों के भोगों,Continue reading “चौरासी लाख योनियों से मुक्ति”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

चिंता- चिता बराबर

चिन्ता सर्वव्यापक रोग है। सारा संसार चिंतारूपी आग में जल रहा है। गुरू नानक देव जी कहते है” चिंतत ही दिसे सभ कोई।।” (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ९३२) गुरु अर्जुन देव जी कहते है ” जिस गृह बहुत तिसे गृह चिंता।। जिस गृह थोरी सु फिरे भ्रमंता।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स १०१९) किसी को पैसाContinue reading “चिंता- चिता बराबर”

गूंगे का गुड़

संतो महात्माओं ने अंतर में सूक्ष्म रूहानी अनुभवों, रूहानी मंडलो की स्थिति और परमात्मा से मिलाप के सहज ज्ञान और आनंद को अकथ, अकह, ला बयान कहा है। यह गूंगे का गुड़ है। जिस तरह गूंगा व्यक्ति गुड़ के स्वाद बयान नहीं कर सकता, उसी प्रकार इस सूक्ष्म अनुभव को स्थूल इन्द्रियों के स्तर परContinue reading “गूंगे का गुड़”

गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा

संत महात्मा अपनी शरण में आए जीव को परमात्मा से मिलाप की मंजिल पर पहुंचने के लिए अंतर्मुख रूहानी अभ्यास की जो युक्ति सीखते है, उसे संत मत में नाम दान, गुरु मंत्र, गुरु उपदेश, गुरु का शब्द, गुरु का नाम, गुरु का वचन, गुरु की दीक्षा आदि नामों से जाना जाता है। इस दीक्षा,उपदेशContinue reading “गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा”

गुरु- ज्ञान, गुरुमत

गुरु- ज्ञान, गुरुमत या संत मत का अर्थ है – गुरुओं और संतो महात्माओं द्वारा बताया गया प्रभु की प्राप्ति का मार्ग या साधन है। संत महात्मा समझाते है कि जिस परमात्मा ने संसार को चलाने के सब नियम बनाए है, उसने अपने साथ मिलाप या मार्ग या साधन भी सृष्टि के आरम्भ में स्वयContinue reading “गुरु- ज्ञान, गुरुमत”

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