जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जायें , तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा ।सेंट मैथ्यू कहा जाता है कि कबीर साहिब जब बाहर जाया करते थे तो एक आदमी उन्हें अकसर खेत में बैठा मिलता था । एक दिन कबीर साहिब ने उससे कहाContinue reading “जहाँ आसा तहाँ बासा”
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मालिक कैसे दया करता है ?
सतगुरु के बिना हकीक़त का भेद नहीं खुल सकता , न कोई मन – माया के बंधनों से छूट सकता है और बिना शब्द के न कोई मालिक से मिल सकता है । केवल सतगुरु ही सुरत को शब्द के साथ जोड़ता है । महाराज सावन सिंह गुरु अमरदास जी के समय का वृत्तांत हैContinue reading “मालिक कैसे दया करता है ?”
गूंगे का गुड़
सन्तों – महात्माओं ने आन्तरिक सूक्ष्म रूहानी अनुभवों , रूहानी मण्डलों की स्थिति और परमात्मा से मिलाप के सहज ज्ञान और आनन्द को अकथ , अकह , ला – बयान कहा है । यह गूंगे का गुड़ है । जिस तरह गूंगा व्यक्ति गुड़ का स्वाद बयान नहीं कर सकता , उसी प्रकार इस सूक्ष्मContinue reading “गूंगे का गुड़”
बरतन को टकोरना
सील गहनि सब की सहनि , कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि , संत जनन को काम ॥ गोस्वामी तुलसीदास दादू जी एक कामिल फ़क़ीर हुए हैं । उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ था । एक बार दो पंडित आपके पास इस ग़रज़ से आये कि चलकर सत्संग सुनें और गुरुContinue reading “बरतन को टकोरना”
भजन – सुमिरन का महत्त्व
जो गुरु का भक्त है वह चाहे कैसा भी है , लेकिन गुरु उसे नरकों में नहीं जाने देता । महाराज सावन सिंह जब राजा जनक स्थूल शरीर को त्यागकर अपने धाम की ओर जा रहे थे , रास्ते में क्या देखते हैं कि नरकों में जीव जल रहे हैं और चीख – पुकार करContinue reading “भजन – सुमिरन का महत्त्व”
भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 )
भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 ) में बताया है , “ चार प्रकार के लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं : दु : खी , भोगों की चाह रखनेवाले , परमार्थी और बुद्धिमान ज्ञानी । ” दुःखी , दु : खों की निवृत्ति के लिए ; भोगी , भोगों की प्राप्ति के लिए ;Continue reading “भगवान कृष्ण ने गीता ( 7:16 )”
डल्ला की परीक्षा
मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”
किसका सेवक ?
कुटुम्ब परिवार मतलब का । बिना धन पास नहिं आई।।स्वामी जी महाराज गुरु गोबिन्द सिंह जी का दरबार लगा हुआ था । सिक्खी का मज़मून चल रहा था । गुरु साहिब ने कहा कि गुरु का शिष्य कोई – कोई है , बाक़ी सब अपने मन के गुलाम हैं या स्त्री और बच्चों के गुलामContinue reading “किसका सेवक ?”
प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा
परमात्मा प्रेम है । जो प्रेम में डूबा हुआ है , वह परमात्मा में समाया हुआ है , और परमात्मा उसमें समाया हुआ है । सेंट जॉन कहते हैं कि एक बार अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे । कुछ फ़ासले पर उन्हें एक जाट आता नज़र आया । अकबर बादशाह ने बीरबलContinue reading “प्रेम से प्रेम , घृणा से घृणा”
ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?
एक महात्मा के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला,’महाराज, मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए।’महात्मा बोले,–‘तुम्हें इस संसार में कौन सी चीजेंContinue reading “ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?”