अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते हैं पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है ।सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुत –Continue reading “झूठे वायदों की सज़ा”
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फिर कभी जलेबी मत माँगना
साकत नर प्रानी सद भूखे नित भूखन भूख करीजै ॥ गुरु रामदास ज़िक्र है कि एक मुसलमान फ़क़ीर एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था । रास्ते में एक हलवाई की दुकान थी । उसने बड़ी अच्छी जलेबियाँ सजाकर रखी हुई थीं । मन ने कहा कि जलेबियाँ खानी हैं । पास पैसा था नहींContinue reading “फिर कभी जलेबी मत माँगना”
आग का मोल
अखी काढ धरी चरणा तल सभ धरती फिर मत पाई ॥ गुरु रामदास कहा जाता है कि शेख़ फ़रीद का एक शिष्य बहुत नेक – पाक था । जब वह बाज़ार जाता तो एक वेश्या उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए उससे मज़ाक किया करती । वह बेचारा दूसरी ओर ध्यान कर लेता ।Continue reading “आग का मोल”
मूर्ख को समझाना बेकार
उन जैसा बहरा और कौन हो सकता है जो सुनेंगे नहीं ।। कहावत एक बार किसी मूर्ख व्यापारी ने एक घोड़े पर एक तरफ़ दो मन गेहूँ लाद दिया तथा दूसरी ओर दो मन रेत डाल ली ताकि बोझ बराबर हो जाये और घोड़े को तकलीफ़ न हो । एक ग़रीब आदमी ने , जोContinue reading “मूर्ख को समझाना बेकार”
अमृत वेला- Time of Nectar
ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”
असली विद्वान कौन ?
मैं अपनी मूर्खता भरी बातें करनेवाली ज़बान से परमात्मा की भेद भरी बातों को बयान करने की हिम्मत नहीं कर सकता । अगर मैं हिम्मत करूँ तो भी बयान नहीं कर सकता । क्लाउड ऑफ़ अननोइंग एक बार एक विद्यार्थी अपनी बी . ए . की पढ़ाई पूरी करके अपने घर जा रहा था ।Continue reading “असली विद्वान कौन ?”
अंधा और भूलभुलैयाँ
कई जनम भए कीट पतंगा ॥ कई जनम गज मीन कुरंगा ॥ कई जनम पंखी सरप होइओ ॥ कई जनम हैवर ब्रिख जोइओ । मिल जगदीस मिलन की बरीआ ॥ चिरंकाल इह देह संजरीआ ॥ गुरु अर्जुन देव एक आदमी अंधा भी था और साथ ही गंजा भी था । थोड़ी सी ग़लती के कारणContinue reading “अंधा और भूलभुलैयाँ”
जो कछु किया साहिब किया
क्या जीवन इन हड्डियों और मांस के शरीर से अधिक मूल्यवान नहीं ? और क्या शरीर पोशाक से अधिक आदर योग्य वस्तु नहीं ? सेंट मैथ्यू कबीर साहिब ने मगहर से काशी में रिहाइश कर ली थी और वहीं सत्संग करना शुरू कर दिया था । उनका उपदेश था कि मनुष्य को अपने अंदर हीContinue reading “जो कछु किया साहिब किया”
व्यर्थ गयी कमाई
जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह।।14 गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह से कहाContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”
बरतन को टकोरना
सील गहनि सब की सहनि , कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि , संत जनन को काम ॥ गोस्वामी तुलसीदास दादू जी एक कामिल फ़क़ीर हुए हैं । उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ था । एक बार दो पंडित आपके पास इस ग़रज़ से आये कि चलकर सत्संग सुनें और गुरुContinue reading “बरतन को टकोरना”