मैं ही कृष्ण मैं ही कंस हुँ।

मैं ही कृष्ण मैं ही कंस हुँ।(दिल को छूने वाली कहानी) एक चित्रकार था, जो अद्धभुत चित्र बनाता था।लोग उसकी चित्रकारी की तारीफ़ करते थे। एक दिन कृष्ण मंदिर के भक्तों ने उनसे कृष्ण और कंस का एक चित्र बनाने की इच्छा प्रगट की। चित्रकार तैयार हो गया आखिर भगवान् का काम था, पर उसनेContinue reading “मैं ही कृष्ण मैं ही कंस हुँ।”

दरद न जाने कोय

मीरा बाई का शब्द हेरी मै तो प्रेम दीवानी, मेरो दरद न जाने कोय। सूली ऊपर सेज हमारी, किस बिध सोना होय। गगन मंडल में सेज पिया की, किस विध मिलना होय। घायल की घायल जानें, की जिन लाई होय। जौहर की गति जौहर जाने, की जिन जौहर होय। दरद की मारी बन बन डोलूContinue reading “दरद न जाने कोय”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)

संक्षेप में शब्द ( धुनात्मक नाम) से मतलब अनाहत या अनहद शब्द है, वह शब्द जो प्रभु का पैदा किया हुआ है और जो बिना किसी साज, यंत्र आदि की सहायता के दिन रात निरंतर हर एक के अंदर हो रहा है। इस शब्द में – जो सतपुरूष का अपना ही विस्तार है – ध्वनिContinue reading “नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)”

नाम या शब्द भाग 3 (divine power)

नाम या शब्द भाग 3 (divine power) धुनात्मक नाम  अंतर में ध्वनि के रूप में आंतरिक कानों द्वारा सुने जाने वाले को धुनात्मक नाम कहते है। इसके अंदर एक और विशेषता होती है कि यह प्रकाश के रूप में अंतर की आंखो द्वारा दिखाई भी देता है। जिसे सुरत और नीरत का खुलना भी कहतेContinue reading “नाम या शब्द भाग 3 (divine power)”

नाम या शब्द भाग-2 (Divine power)

नाम का अभ्यास बड़ा उत्तम कर्म है, मनुष्य का उद्धार ही इसकी कमाई करने से होता है। पर आम संसारी अपनी समझ में आकर प्रभु का कोई भी एक नाम चुन लेते है और उसकी आराधना शुरू कर देते है।से सोचते है कि सब नाम उसी के है और यह ठीक भी है; लेकिन नामContinue reading “नाम या शब्द भाग-2 (Divine power)”

नाम या शब्द (divine power)

नाम- भाग 1 अगर कोई नदी पार करनी हो तो यात्री मल्लाह की शरण लेता है और मल्लाह उसे अपनी नाव में बिठा लेता है। जीवात्मा के खेवट – सतगुरू के बारे में विचार किया जा चुका है। अब एक दृष्टि उसकी नाव – “नाम “- पर भी डाल ली जाए।संत्मत या गुरूमत को नाम मार्गContinue reading “नाम या शब्द (divine power)”

परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द

नाम का सौदा धन कमाने के लिए व्यापारी व्यापार करता है और व्यापार करने के लिए उसे पूंजी की आवश्यकता होती है।वह पूंजी किसी सगे संबधियों से मिलती है, इससे वह माल खरीदकर बेचता है, लाभ कमात है और धनवान होता चला जाता है। परमार्थ की पूंजी नाम है और उसे देने वाले स्नेही संबधीContinue reading “परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द”

पूर्ण सतगुरु की पहचान

पूर्ण संतो ने सावधान किया है कि गुरु होना ही काफी नहीं, गुरु पूर्ण होना चाहिए। पूरा गुरु वह है जो अपनी आत्मा परमात्मा में अभेद करके उसका रूप हो चुका हो । आदि ग्रंथ पृष्ठ स 286 में गुरु अर्जुन देव जी कहते है:सत पुरख जिन जानिया, सतिगुर तिस का नाउ।।तिस कै संग सिखContinue reading “पूर्ण सतगुरु की पहचान”

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