सिमरन के रूप सिमरन संस्कृत के ‘ स्मृ ‘ धातु से बना है जिसका अर्थ है याद करना , किसी मन्त्र आदि को याद करना या बार – बार दोहराना । सिमरन में कई प्रकार के जाप शामिल हैं । कई लोग हाथों की अंगुलियों से , कई जबान से , कई कण्ठ से ,Continue reading “सिमरन के रूप”
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बाहर मुखी साधना
संत दरिया मारवाड़ वाले बहुत से लोग पाठ पूजा, तीर्थ व्रत, दान पुण्य , घर बार त्याग कर जंगलों पहाड़ों में भटकना आदि बहार्मुखी क्रियाओं को भक्ति का साधन मान बैठते है। बाहरमुखी साधना के पीछे भाग रही दुनिया को सचेत करते हुए दरिया साहिब फरमाते है: दुनिया भरम बोराई । आतमराम सकल घट भीतरContinue reading “बाहर मुखी साधना”
अमृत कैसे प्राप्त होगा
अमृत का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि जिसके सेवन से हम अमर हो जाय । सूफी फकीरो ने इसे ‘ आबे हयात’ यानी अमर जीवन प्रदान करने वाला जल कहा है। यह संसार, इसके सब पदार्थ और रिश्ते- नाते नाशवान है यानी एक दिन सबको खत्म हो जाना है। सारी त्रिलोकी मृत्यु और विनाशContinue reading “अमृत कैसे प्राप्त होगा”
रूहानियत की जरूरत
रूहानियत की जरूरत आजकल सारे संसार में खींच – तान , चिन्ता और फ़िक्र का राज्य नज़र आ रहा है । पहुँचे हुए महात्माओं को छोड़कर कोई भी , चाहे वह किसी भी वर्ग से सम्बन्धित है , इससे नहीं बच सका है । यह इस बात का प्रमाण है कि आजकल रूहानियत का दिवालाContinue reading “रूहानियत की जरूरत”
दुनियाँ भरम भूल बौराई (संत दरिया)
दुनियाँ भरम भूल बौराई ।। आतम राम सकल घट भीतर जाकी सुद्ध न पाई । मथुरा कासी जाय द्वारिका , अरसठ तीरथ न्हावै । सतगुर बिन सोधा नहिं कोई , फिर फिर गोता खावै ॥ चेतन मूरत जड़ को सेवै बड़ा थूल मत गैला । देह अचार किया कहा होई , भीतर है मन मैलाContinue reading “दुनियाँ भरम भूल बौराई (संत दरिया)”
हमारे लिए चेतावनी
कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”
आंतरिक मार्ग
अगर हमें अपने घर के अन्दर जाना हो तो सबसे पहले घर के दरवाजे की तलाश करनी पड़ती है । निज – घर का वह दरवाजा आँखों के पीछे तीसरी आँख , एक आँख या तीसरा तिल है । उसी को खोलने के लिए हम उसको खटखटाते हैं यानी बार – बार सिमरन और ध्यानContinue reading “आंतरिक मार्ग”
सिद्धों के साथ सँवाद
भक्त रविदास जी उसतति सुनकर सिद्धों के मन में भी दर्शन करने की चाह पैदा हो गई। गोरखनाथ समेत सिद्ध-मण्डली तीर्थ यात्रा करती हुई काशीपुरी में पहुँची। भक्त रविदास जी के स्थान पर वह आदेश आदेश कहकर बैठ गए। गोरखनाथ ने परख करने के लिए अपने पैरों का एक पैला बनाने के लिए दिया। जबContinue reading “सिद्धों के साथ सँवाद”
कोई बोले राम,कोई खुदा
आदि ग्रंथ में गुरु अर्जुन देवजी ने फरमाया है: कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ।। कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ।। कारण करण करीम । किरपा धारि रहीम ॥ कोई नावै तीरथि कोई हज जाइ ।। कोई करै पूजा कोई सिरु निवाइ ॥ कोई प . बेद कोई कतेब । कोई ओढे नील कोईContinue reading “कोई बोले राम,कोई खुदा”
सच्चे धर्म का सार
यह लेख मूल रूप से राधा स्वामी ब्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक “गुरूमत सार” में से लिया है। इसमें जो अधिकतर बाणी या आयते है वो फारसी या अरबी में है उनका अर्थ साथ ही दिया गया है। सच्चो धर्म का सार अंश और अंशी मूल रूप में एक ही हैं । सब मनुष्य उसी एकContinue reading “सच्चे धर्म का सार”