ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहाँ जाऊँ ? तेरी हुजूरी से भागकर कहाँ जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ , तू वहाँ भी मौजूद है । यदि पाताल में अपना डेरा तान लूँ तो तू वहाँ भी है ।129 साम्ज़ किसी महात्मा के पास दो आदमीContinue reading “मालिक सब देखता है”
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संतों के सामने घमंड
होह सभना की रेणुका तउ आउ हमारे पास ॥131 गुरु अर्जुन देव शेख़ फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रूहानियत की गहरी लगन थी । उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था जो राजस्थान के एक शहर अजमेर में रहते थे । उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुँचे तो देखा किContinue reading “संतों के सामने घमंड”
मुर्दा खाने का हुक्म
अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”
चोर से कुतुब
यदि खुश्क पत्थर या संगमरमर है तो कामिल फकीर की सोहबत में जाने पर तू हीरा बन जायेगा ।67 हजरत अब्दुल कादिर जीलानी फ़ारस देश के बहुत कमाई वाले महात्मा थे । मुसलमानों में फकीरों के दर्जे होते हैं – कुतुब , गौस आदि । किसी जगह मौलाना रूम का क्रुतुब मर गया था ।Continue reading “चोर से कुतुब”
महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच
साहिब के दरबार में केवल भक्ति पियार ॥ केवल भक्ति पियार साहिब भक्ती में राजी ।। पलटू साहिब महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच जब महाभारत की लड़ाई ख़त्म हुई तो भगवान कृष्ण ने पांडवों को बुलाकर कहा कि अश्वमेध यज्ञ कराओ , प्रायश्चित्त करो , नहीं तो नरकों में जाओगे । लेकिन तुम्हारा यज्ञ तबContinue reading “महारानी द्रौपदी और महात्मा सुपच”
सच्चा शिष्य कौन ?
सच्चा शिष्य कौन ? सबद मरै सोई जन पूरा ॥ सतगुर आख सुणाए सूरा ॥72 गुरु अमरदास सत्ता और बलवंडा नामक दो पाठी थे । वे गुरु अर्जुन साहिब के दरबार में कीर्तन किया करते थे । उन्हें भ्रम हो गया कि उनके कीर्तन के कारण ही इतनी संगत जुड़ती है । इसी अभिमान नेContinue reading “सच्चा शिष्य कौन ?”
चौरासी लाख योनियों से मुक्ति
गुरू अर्जुन देव जी कहते है: लख चौरासी जोन सबाईं।। मानस कऊ प्रभ दी वडयाई।। इस पउड़ी ते जो नर चुके, सो आइ जाइ दुख पाईदा।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स १०७५) गुरू साहिब चेतावनी दे रहे है कि जो लोग प्रभु की अपार दया से मिले मनुष्य जन्म के अमूल्य अवसर को इन्द्रियों के भोगों,Continue reading “चौरासी लाख योनियों से मुक्ति”
सतगुरु
सतगुरु : सन्त – सतगुरु मालिक का नर – रूप अवतार है जिसके अन्दर सत्य प्रकट है और जो सत्य से अभेद है । उसके अन्दर सत्य रमा हुआ है । मालिक से मिलकर उसमें मालिक का तेज आ गया । वह पवित्र हस्ती है , उसमें सत्य ख़ुद देह – स्वरूप में प्रकट हैContinue reading “सतगुरु”
सत्संग का अर्थ
सत्संग : ‘ सत् ‘ का मतलब है ‘ सत्य ‘ या ‘ सच्च ‘ , ‘ जीवित ‘ या ‘ जाग्रत ‘ , और ‘ संग ‘ का मतलब है ‘ साथ ‘ या ‘ सोहबत ‘ , यानी सदा कायम रहनेवाले पुरुष की सोहबत या संगति का नाम सत्संग है । सतगुरु सत्Continue reading “सत्संग का अर्थ”
धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व
ग्रन्थों – पोथियों में महात्माओं की रूहानी मण्डलों की यात्रा का वर्णन और उनके निजी अनुभवों का उल्लेख है , जिनको हमारे मार्ग – दर्शन के लिए उन्होंने पुस्तकों में लिखा । हमारे दिल में उनके लिये इज़्ज़त है । उन्हें पढ़कर हमारे अन्दर किसी हद तक परमार्थ का शौक़ और मालिक से मिलने काContinue reading “धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व”