धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व

ग्रन्थों – पोथियों में महात्माओं की रूहानी मण्डलों की यात्रा का वर्णन और उनके निजी अनुभवों का उल्लेख है , जिनको हमारे मार्ग – दर्शन के लिए उन्होंने पुस्तकों में लिखा । हमारे दिल में उनके लिये इज़्ज़त है । उन्हें पढ़कर हमारे अन्दर किसी हद तक परमार्थ का शौक़ और मालिक से मिलने काContinue reading “धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

सिमरन के रूप

सिमरन के रूप सिमरन संस्कृत के ‘ स्मृ ‘ धातु से बना है जिसका अर्थ है याद करना , किसी मन्त्र आदि को याद करना या बार – बार दोहराना । सिमरन में कई प्रकार के जाप शामिल हैं । कई लोग हाथों की अंगुलियों से , कई जबान से , कई कण्ठ से ,Continue reading “सिमरन के रूप”

मनुष्य धर्म

परमात्मा ने मनुष्य बनाये धर्मों की स्थापना बाद में हुई । मनुष्य धर्म के लिए नहीं बनाये गये थे , लेकिन धर्म मनुष्य की आत्मिक उन्नति के लिए बनाये गये थे ताकि वे उस परम आनन्द का अनुभव कर सकें जो केवल परमात्मा से मिलाप करने पर होता है । आजकल नयी सुविधाओं , भौतिकContinue reading “मनुष्य धर्म”

कलाम हजरत सुल्तान बाहू

पढ़ पढ़ इलम हजार कताबां, आलिम होए भारे हूं । हरफ़ इक इश्क दा पढ़ न जाणन, भुल्ले फिरन विचारे हूं । इक निगाह जे आशिक वेखे, लख हजारां तारे हूं । लक्ख निगाह जे आलिम वेखे,किसे न कधी चाढ़े हूं। इश्क अक़ल विच मंजल भारी,सैआं कोहां दे पाड़े हू। जिन्हां इश्क खरीद न कीता,Continue reading “कलाम हजरत सुल्तान बाहू”

आत्मा की विनती और पुकार

*करू बेनती दऊ कर जोरी अरज सुनो राधास्वामी मोरीस्वामीजी यहा पर आत्मा की पुकार का इस बेनती के जरीये वर्णन कर रहे है यह प्रार्थना आत्मा अपने पती रूपी परमात्मा से यहा पर कर रही है , हे सच्चे पातशाहा मै दोनो हाथ जोडकर तुम्हारे सामने अरदास कर रही हू आप मेरी अरदास स्वीकार करContinue reading “आत्मा की विनती और पुकार”

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