ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार

उपनिषदों के अनुसार जप – तप , दान – पुण्य और धर्मग्रंथों के पठन – पाठन में परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती । उसे केवल ध्यान – साधना द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त किया जा सकता है । न चक्षुधा गृहाते नापि वाचा नान्यैर्देवैः तपसा कर्मणा वा । ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्त्वः ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानःContinue reading “ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार”

Design a site like this with WordPress.com
Get started