दुनियाँ भरम भूल बौराई ।। आतम राम सकल घट भीतर जाकी सुद्ध न पाई । मथुरा कासी जाय द्वारिका , अरसठ तीरथ न्हावै । सतगुर बिन सोधा नहिं कोई , फिर फिर गोता खावै ॥ चेतन मूरत जड़ को सेवै बड़ा थूल मत गैला । देह अचार किया कहा होई , भीतर है मन मैलाContinue reading “दुनियाँ भरम भूल बौराई (संत दरिया)”
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आंतरिक मार्ग
अगर हमें अपने घर के अन्दर जाना हो तो सबसे पहले घर के दरवाजे की तलाश करनी पड़ती है । निज – घर का वह दरवाजा आँखों के पीछे तीसरी आँख , एक आँख या तीसरा तिल है । उसी को खोलने के लिए हम उसको खटखटाते हैं यानी बार – बार सिमरन और ध्यानContinue reading “आंतरिक मार्ग”
कोई बोले राम,कोई खुदा
आदि ग्रंथ में गुरु अर्जुन देवजी ने फरमाया है: कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ।। कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ।। कारण करण करीम । किरपा धारि रहीम ॥ कोई नावै तीरथि कोई हज जाइ ।। कोई करै पूजा कोई सिरु निवाइ ॥ कोई प . बेद कोई कतेब । कोई ओढे नील कोईContinue reading “कोई बोले राम,कोई खुदा”
सच्चे धर्म का सार
यह लेख मूल रूप से राधा स्वामी ब्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक “गुरूमत सार” में से लिया है। इसमें जो अधिकतर बाणी या आयते है वो फारसी या अरबी में है उनका अर्थ साथ ही दिया गया है। सच्चो धर्म का सार अंश और अंशी मूल रूप में एक ही हैं । सब मनुष्य उसी एकContinue reading “सच्चे धर्म का सार”
हमारे लिए चेतावनी
कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”