एक बार एक सत्संगी दरबार साहिब आ रहा था।लंगर के लिये कुछ रसद भी साथ उठा कर आ रहा था। यह गुरु अर्जुन देव जी के समय की बात है। गर्मी के दिन थे।अमृतसर शहर से थोड़ा पहले वह एक बृक्ष की छावं में आराम करने बैठा। गुरु के दर्शन के लिए वह पहली बारContinue reading ““निमाणा-निताणा””
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मन की बाँसुरी
” बाँस की बाँसुरी में से आवाज निकलती है क्योंकि वह खोखली होती है। ठोस लकड़ी का टुकड़ा बाँस की बाँसुरी वाला काम नहीं कर सकता। अभ्यास के समय मन को विचारों से ख़ाली कर देना बाँसुरी बन जाने के समान है। जब अपने आप को अन्तर में विचारों से पूरी तरह ख़ाली करके भजनContinue reading “मन की बाँसुरी”
अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं
अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही?दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजाContinue reading “अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं”
नाम की महिमा
आप तरै जन पितरा तारेसंगत मुकत सो पार उतारे। आप देखो, गुरु साहिब “नाम” की कितनी महिमा करते हैं। कहते हैं कि जो “नाम” की कमाई करते हैं, वे आप भी तर जाते हैं और उनके ‘पित्तरों’ को भी उनके अभ्यास से लाभ पहुँचता है। उच्च श्रेणी के भक्त के अभ्यास और भक्ति से उसकेContinue reading “नाम की महिमा”
भरोसा
एक व्यक्ति की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नी के साथ घूम कर वापिस अपने घर आ रहे थे। रास्ते में जब दोनों को एक नदी को नाव से पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया। वो आदमी वीर था लेकिन औरत बहुत डरी हुई थी क्योंकि हालात बहुतContinue reading “भरोसा”