मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1

मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1 आदि ग्रंथ मे पृष्ठ सं 1075  गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है: “लाख चौरासी जोन सबाई।। मानस को प्रभ दी वड आई।।इस पौड़ी ते जो नर चुंके, सो आई जाइ दुख पाईदा।।” इन्सान को  दूसरे जीवों के मुकाबले श्रेष्ठ बुद्धि इसीलिए मिली है कि वह इस चरण में अपनीContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1”

परमात्मा की खोज में

परमात्मा की खोज हर एक महात्मा हम यही उपदेश देता है कि जब तक हमारी आत्मा अपने असल में जाकर नहीं समाती, तब तक इसका जन्म मरण के दुखो से छुटकारा नहीं हो सकता। इसीलिए हर एक को परमात्मा की खोज है। हम सब दुनिया के जीव अपनी अपनी अक्ल के अनुसार हजारों स्थानों परContinue reading “परमात्मा की खोज में”

अहंकार (हउमे) की रुकावट

हमारे मन में कुदरती ही यह विचार आता है कि अगर परमात्मा हर एक के अंदर है तो हमे अपने अंदर नजर क्यो नही आता? हमारे अंदर किस चीज की रुकावट है? वह रुकावट किस प्रकार दूर हो सकती है? गुरु अर्जुन देव फरमाते है: अंतर अलख न जाई लखया, विच परदा हउमे पाई।। अंतरContinue reading “अहंकार (हउमे) की रुकावट”

परमात्मा कहा है?

मनुष्य के सामने यह सवाल हमेशा से रहा है कि परमात्मा वास्तव में है भी या नहीं। यदि है तो उससे मिलाप कैसे हो सकता है।इस विषय पर कई ग्रंथ पोथियां लिखी गई, पर इसका सही जवाब वक्त के पूर्ण संत सतगुरु जी दे सकते है क्यो कि वे परमात्मा से मिलाप कर चुके होतेContinue reading “परमात्मा कहा है?”

जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)

संक्षेप में शब्द ( धुनात्मक नाम) से मतलब अनाहत या अनहद शब्द है, वह शब्द जो प्रभु का पैदा किया हुआ है और जो बिना किसी साज, यंत्र आदि की सहायता के दिन रात निरंतर हर एक के अंदर हो रहा है। इस शब्द में – जो सतपुरूष का अपना ही विस्तार है – ध्वनिContinue reading “नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)”

नाम या शब्द भाग 3 (divine power)

नाम या शब्द भाग 3 (divine power) धुनात्मक नाम  अंतर में ध्वनि के रूप में आंतरिक कानों द्वारा सुने जाने वाले को धुनात्मक नाम कहते है। इसके अंदर एक और विशेषता होती है कि यह प्रकाश के रूप में अंतर की आंखो द्वारा दिखाई भी देता है। जिसे सुरत और नीरत का खुलना भी कहतेContinue reading “नाम या शब्द भाग 3 (divine power)”

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