विरह – वेदना

प्रभात – वेला की इबादत और रात भर मालिक के वियोग में विलाप मालिक की प्राप्ति के ख़ज़ाने की कुंजी हैं । ख्वाजा हाफ़िज़ शेख शिबली एक दिन अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । सर्दी का मौसम था , आग जल रही थी । अचानक उनका ध्यान चूल्हे में जलती हुई लकड़ी के एकContinue reading “विरह – वेदना”

जो कछु किया साहिब किया

क्या जीवन इन हड्डियों और मांस के शरीर से अधिक मूल्यवान नहीं ? और क्या शरीर पोशाक से अधिक आदर योग्य वस्तु नहीं ? सेंट मैथ्यू कबीर साहिब ने मगहर से काशी में रिहाइश कर ली थी और वहीं सत्संग करना शुरू कर दिया था । उनका उपदेश था कि मनुष्य को अपने अंदर हीContinue reading “जो कछु किया साहिब किया”

बरतन को टकोरना

सील गहनि सब की सहनि , कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि , संत जनन को काम ॥ गोस्वामी तुलसीदास दादू जी एक कामिल फ़क़ीर हुए हैं । उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ था । एक बार दो पंडित आपके पास इस ग़रज़ से आये कि चलकर सत्संग सुनें और गुरुContinue reading “बरतन को टकोरना”

आधी रात का सूरज

तो भी अंधकार तुझसे न छिपायेगा , रात तो दिन के समान प्रकाश देगी ; क्योंकि तेरे लिए अंधियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं । साम्ज़ एक बार का ज़िक्र है , गुरु नानक साहिब के पास आपके बड़े लड़के श्री चन्द जी बैठे थे । आधी रात का समय था । आपने कहाContinue reading “आधी रात का सूरज”

अमृत कैसे प्राप्त होगा

अमृत का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि जिसके सेवन से हम अमर हो जाय । सूफी फकीरो ने इसे ‘ आबे हयात’ यानी अमर जीवन प्रदान करने वाला जल कहा है। यह संसार, इसके सब पदार्थ और रिश्ते- नाते नाशवान है यानी एक दिन सबको खत्म हो जाना है। सारी त्रिलोकी मृत्यु और विनाशContinue reading “अमृत कैसे प्राप्त होगा”

रूहानियत की जरूरत

रूहानियत की जरूरत आजकल सारे संसार में खींच – तान , चिन्ता और फ़िक्र का राज्य नज़र आ रहा है । पहुँचे हुए महात्माओं को छोड़कर कोई भी , चाहे वह किसी भी वर्ग से सम्बन्धित है , इससे नहीं बच सका है । यह इस बात का प्रमाण है कि आजकल रूहानियत का दिवालाContinue reading “रूहानियत की जरूरत”

गड़रिये की भेंट

वे लोग धन्य हैं जिनका मन पवित्र है , क्योंकि केवल उन लोगों को ही प्रभु का दीदार हासिल होगा । सेंट मैथ्यू मनुष्य के अंदर दो बड़े गुण हैं । एक भय और दूसरा भाव यानी डर और प्यार । जिसको परमात्मा का डर है , उसको परमात्मा से प्यार भी है । जिसकोContinue reading “गड़रिये की भेंट”

एक घड़ी की संगति

गोबिंद जीउ सतसंगत मेल हर धिआईऐ । गुरु रामदास एक साहूकार का नियम था कि वह अपने असामियों से सूद – दर – सूद लिया करता था । एक दिन वह एक गाँव में किसी ग़रीब किसान के घर अपने पैसों की वसूली करने गया । ब्याज कम करने के लिए किसान ने बहुत ज़ोरContinue reading “एक घड़ी की संगति”

संतों के सामने घमंड

होह सभना की रेणुका तउ आउ हमारे पास ॥131 गुरु अर्जुन देव शेख़ फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रूहानियत की गहरी लगन थी । उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था जो राजस्थान के एक शहर अजमेर में रहते थे । उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुँचे तो देखा किContinue reading “संतों के सामने घमंड”

मुर्दा खाने का हुक्म

अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”

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