यह लेख मूल रूप से राधा स्वामी ब्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक “गुरूमत सार” में से लिया है। इसमें जो अधिकतर बाणी या आयते है वो फारसी या अरबी में है उनका अर्थ साथ ही दिया गया है। सच्चो धर्म का सार अंश और अंशी मूल रूप में एक ही हैं । सब मनुष्य उसी एकContinue reading “सच्चे धर्म का सार”
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परमात्मा की नजर में सब बराबर है..
जब – जब महात्मा संसार में आते हैं , वे संसार को यही उपदेश देते हैं कि सब इनसान मालिक ने पैदा किये हैं , इसलिए सब बराबर हैं । अगर दुनियावी परमात्मा की नजर में सब बराबर हैं नजर से विचार करें , तो भी मूल रूप से सब समान हैं – चाहे वेContinue reading “परमात्मा की नजर में सब बराबर है..”
मनुष्य धर्म
परमात्मा ने मनुष्य बनाये धर्मों की स्थापना बाद में हुई । मनुष्य धर्म के लिए नहीं बनाये गये थे , लेकिन धर्म मनुष्य की आत्मिक उन्नति के लिए बनाये गये थे ताकि वे उस परम आनन्द का अनुभव कर सकें जो केवल परमात्मा से मिलाप करने पर होता है । आजकल नयी सुविधाओं , भौतिकContinue reading “मनुष्य धर्म”
असली सूरमा या बहादुर
स्वामी जी महाराज की बाणी में आता है। सारबचन संग्रह (19:2:7-11) जिन्होने मार मन डाला। उन्हीं को सूरमा कहना।। बड़ा बेरी यह मन घट में। इसी का जीतना कठिना।। पड़ो तुम इस ही के पीछे। और सबहि जतन तजना।। गुरु की प्रीत कर पहिले। बहुर घट शब्द को सुनना।। मान दो बात यह मेरी। करेContinue reading “असली सूरमा या बहादुर”
कलाम हजरत सुल्तान बाहू
पढ़ पढ़ इलम हजार कताबां, आलिम होए भारे हूं । हरफ़ इक इश्क दा पढ़ न जाणन, भुल्ले फिरन विचारे हूं । इक निगाह जे आशिक वेखे, लख हजारां तारे हूं । लक्ख निगाह जे आलिम वेखे,किसे न कधी चाढ़े हूं। इश्क अक़ल विच मंजल भारी,सैआं कोहां दे पाड़े हू। जिन्हां इश्क खरीद न कीता,Continue reading “कलाम हजरत सुल्तान बाहू”
परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1
परमेश्वर तक पहुंचना कोई हंसी मजाक की बात नहीं।वह तो मानो किसी मजबूत किले में बैठा हुआ है और वह क़िला है मोटी पथरीली दीवारों और वज्र के मजबूत कपाटोवला। न दीवारे ढह सकती है, न कपाट ही टूटते है।इसलिए उसके अंदर जाने के लिए कोई उपाय नहीं बनता। हां, अगर एक सीढ़ी मिल जाए,Continue reading “परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1”
संत दरिया मारवाड़ वाले -16
मुरली कौन बजावै हो , गगन मँडल के बीच ॥ त्रिकुटी संगम होय कर , गंग जमुन के घाट । या मुरली के सब्द से , सहज रचा बैराट । गंग जमुन बिच मुरली बाजै , उत्तर दिस धुन होय। त उन मुरली की टेरहि सुनि सुनि , रहीं गोपिका मोहि ॥ जहँ अधर डालीContinue reading “संत दरिया मारवाड़ वाले -16”
हमारे लिए चेतावनी
कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”