स्वयं को मालिक को सौंप दो और शैतान का सामना करो , तो वह तुम्हारे पास भाग निकलेगा । परमेश्वर के निकट आओ तो वह भी तुम्हारे निकट आयेगा । सेंट जेम्स एक महात्मा बाज़ार में से गुज़र रहा था । रास्ते में एक कुँजड़े ने खजूरें बेचने के लिए रखी हुई थीं । मनContinue reading “खजूरों की चाह”
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हज़रत जुनैद और घायल कुत्ता
मेरे संपूर्ण पवित्र पर्वत पर न वे किसी को चोट पहुँचायेंगे नष्ट करेंगे , क्योंकि धरती यहोवा ( प्रभु ) के ज्ञान से भरपूर रहेगी जैसे समुद्र पानी से भरा रहता है ।इसायाह जब हज़रत जुनैद बग़दादी क़ाबा को जा रहा था तो उसने रास्ते में एक कुत्ते को देखा , जो ज़ख़्मी हालत मेंContinue reading “हज़रत जुनैद और घायल कुत्ता”
चेतना का स्तर
ऐ मानव ! तू कब तक घड़े के बाहरी साँचे – ढाँचे और सजावट से मोहित होकर भ्रम में पड़ा रहेगा ? इनसे हटकर , घड़े के अन्दर जो पानी है उसकी ओर दृष्टि डाल । तू कब तक बाहरी सूरतों पर मोहित होता रहेगा ? हक़ीक़त का खोजी बन और हक़ीक़त की तलाश करContinue reading “चेतना का स्तर”
अमृत वेला- Time of Nectar
ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”
अमृत कैसे प्राप्त होगा
अमृत का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि जिसके सेवन से हम अमर हो जाय । सूफी फकीरो ने इसे ‘ आबे हयात’ यानी अमर जीवन प्रदान करने वाला जल कहा है। यह संसार, इसके सब पदार्थ और रिश्ते- नाते नाशवान है यानी एक दिन सबको खत्म हो जाना है। सारी त्रिलोकी मृत्यु और विनाशContinue reading “अमृत कैसे प्राप्त होगा”
धरती की परिक्रमा
गुरु के बिना सब कर्म – धर्म निष्फल हैं , ‘ बिन मुर्शिद कामल बुल्लया तेरी ऐवें गई इबादत कीती ‘ । जब तक जीव की अंतर की आँख नहीं खुलती और हक़ीक़त से संबंध नहीं होता , उसका कल्याण नहीं हो सकता । इस कार्य के लिए हमें किसी गुरु की शरण लेनी पड़तीContinue reading “धरती की परिक्रमा”
पीर की जूती का मोल
जब हमारा प्रेम सबकी ओर से हटकर केवल गुरु के साथ – लग जाता है , तो हम दुनिया के सब बंधनों और मलिनताओं से मुक्त हो जाते हैं और परमात्मा से जुड़ जाते हैं। महाराज सावन सिंह अमीर खुसरो , निज़ामुद्दीन औलिया का शागिर्द और काबुल के हाकिम का मुलाज़िम था । बड़ा कमाईContinue reading “पीर की जूती का मोल”
प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी
मनुष्य अपनी विपत्तियों को निमंत्रण देता है और फिर इन दुःखदायी अतिथियों के प्रति विरोध प्रकट करता है , क्योंकि वह भूल जाता है कि उसने कैसे , कब और कहाँ उन्हें निमंत्रण पत्र लिखे तथा भेजे थे । परंतु समय नहीं भूलता ; समय उचित अवसर पर हर निमंत्रण – पत्र ठीक पते परContinue reading “प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी”
गड़रिये की भेंट
वे लोग धन्य हैं जिनका मन पवित्र है , क्योंकि केवल उन लोगों को ही प्रभु का दीदार हासिल होगा । सेंट मैथ्यू मनुष्य के अंदर दो बड़े गुण हैं । एक भय और दूसरा भाव यानी डर और प्यार । जिसको परमात्मा का डर है , उसको परमात्मा से प्यार भी है । जिसकोContinue reading “गड़रिये की भेंट”
एक घड़ी की संगति
गोबिंद जीउ सतसंगत मेल हर धिआईऐ । गुरु रामदास एक साहूकार का नियम था कि वह अपने असामियों से सूद – दर – सूद लिया करता था । एक दिन वह एक गाँव में किसी ग़रीब किसान के घर अपने पैसों की वसूली करने गया । ब्याज कम करने के लिए किसान ने बहुत ज़ोरContinue reading “एक घड़ी की संगति”