असल गुरु की पहचान

गुर पीर सदाए मंगण जाए ॥ ता कै मूल न लगीऐ पाए ॥ घाल खाए किछ हथहो दे ॥ नानक राह पछाणह से ॥ जो गुरु और पीर अपने शिष्यों – सेवकों से माँगते फिरते हैं , उनके पैरों पर माथा ही नहीं टेकना चाहिए । कैसे महात्मा को ढूँढ़ना है ? जो स्वयं मेहनतContinue reading “असल गुरु की पहचान”

जीवित गुरु की आवश्यकता

1. गुरु और गोविन्द एक ही हैं सच्चे सन्त परमात्मा में मिलकर परमात्मा रूप हो चुके होते हैं । अत : परमात्मा की प्राप्ति सन्तों द्वारा ही हो सकती है और सन्त परमात्मा की कृपा से ही मिलते हैं । स्वयं भगवान् का यह कहना है कि जिस तरह दूध में मिलकर पानी और जलContinue reading “जीवित गुरु की आवश्यकता”

मूर्ख को समझाना बेकार

उन जैसा बहरा और कौन हो सकता है जो सुनेंगे नहीं ।। कहावत एक बार किसी मूर्ख व्यापारी ने एक घोड़े पर एक तरफ़ दो मन गेहूँ लाद दिया तथा दूसरी ओर दो मन रेत डाल ली ताकि बोझ बराबर हो जाये और घोड़े को तकलीफ़ न हो । एक ग़रीब आदमी ने , जोContinue reading “मूर्ख को समझाना बेकार”

अमृत वेला- Time of Nectar

ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”

असली विद्वान कौन ?

मैं अपनी मूर्खता भरी बातें करनेवाली ज़बान से परमात्मा की भेद भरी बातों को बयान करने की हिम्मत नहीं कर सकता । अगर मैं हिम्मत करूँ तो भी बयान नहीं कर सकता । क्लाउड ऑफ़ अननोइंग एक बार एक विद्यार्थी अपनी बी . ए . की पढ़ाई पूरी करके अपने घर जा रहा था ।Continue reading “असली विद्वान कौन ?”

जो कछु किया साहिब किया

क्या जीवन इन हड्डियों और मांस के शरीर से अधिक मूल्यवान नहीं ? और क्या शरीर पोशाक से अधिक आदर योग्य वस्तु नहीं ? सेंट मैथ्यू कबीर साहिब ने मगहर से काशी में रिहाइश कर ली थी और वहीं सत्संग करना शुरू कर दिया था । उनका उपदेश था कि मनुष्य को अपने अंदर हीContinue reading “जो कछु किया साहिब किया”

व्यर्थ गयी कमाई

जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह।।14 गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह से कहाContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”

नदी पार करने का मंत्र

यदि तुमको राई के दाने के बराबर भी विश्वास होता , तो तुम इस शहतूत के पेड़ से अगर कहते कि जड़ से उखड़कर समुद्र में लग जा , तो वह तुम्हारी मान लेता ।80 सेंट ल्यूक एक बार का ज़िक्र है , एक स्त्री किसी महापुरुष की सेवा किया करती थी । महात्मा काContinue reading “नदी पार करने का मंत्र”

भाई सुथरा और महात्मा की आग

– क्रोध में रूह फैलती है । जब क्रोध करो , आँखें लाल सुर्ख हो जाती हैं । रोम – रोम खड़ा हो जाता है , चेहरा और ही हो जाता है । यहाँ तक कि आदमी अक्ल से बेबहरा हो जाता है यानी संतुलन खो बैठता है । महाराज सावन सिंह गुरु अर्जुन साहिबContinue reading “भाई सुथरा और महात्मा की आग”

अंधा और भूलभुलैयाँ

कई जनम भए कीट पतंगा ॥ कई जनम गज मीन कुरंगा ॥ कई जनम पंखी सरप होइओ ॥ कई जनम हैवर ब्रिख जोइओ । मिल जगदीस मिलन की बरीआ ॥ चिरंकाल इह देह संजरीआ।। गुरु अर्जुन देव एक आदमी अंधा भी था और साथ ही गंजा भी था । थोड़ी सी ग़लती के कारण राजाContinue reading “अंधा और भूलभुलैयाँ”

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