जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

पाठ आध्यात्म की नजर से

अक्सर देखने को मिलता है कि साधारण व्यक्ति ही नहीं, ग्रंथो शास्त्रों के ज्ञाता, महान विद्वान और प्रवक्ता भी इन शास्त्रों की खूब जोर शोर से व्याख्या करते है, परन्तु उनका अपना जीवन शास्त्रों में दिए उपदेश से बिल्कुल उलट होता है। संतो महात्माओं ने इस प्रकार के पाठ विचार करने वालों को चंड़ुल पक्षीContinue reading “पाठ आध्यात्म की नजर से”

कौन है मेरा रिश्तेदार या मित्र?

संत हमेशा से हमे रिश्तों की असलियत समझाते है, ताकि हम इनके मोह में फसकर संसार में आने के अपने असल उद्देश्य को न भुला दे। आदि ग्रंथ (पृष्ठ स 700) पर गुरु अर्जुनदेव जी फरमाते है कोई जाने कवन ईहा जग मीत।। जिस होई कृपाल सोई बिधि बुझे ता की निर्मल रीति।। मात पिताContinue reading “कौन है मेरा रिश्तेदार या मित्र?”

गलत यात्रा (wrong path)

अगर दिन में जब आप किसी भी समस्या का सामना नहीं करते है तो – आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल कर रहे हैं।”  – स्वामी विवेकानंद आज सुबह ये सुंदर विचार पढ़ा तो सोचा आपके साथ सांझा करू। स्वामी विवेकानन्द जी कहते है कि अगर हमारी जिंदगी बहुतContinue reading “गलत यात्रा (wrong path)”

मन क्या है? इसे कैसे जीते?

मन की रचना के बारे में गुरु नानक साहिब फरमाते है (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ४१५) ईह मन करमा ईह मन धरमा।। ईह मन पंच तत ते जनमा।। कबीर साहिब कहते है: (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ३४२) ईह मन सकती ईह मन सीउ।।ईह मन पंच तत को जीउ।। गुरु नानक साहिब और कबीर साहिब यहContinue reading “मन क्या है? इसे कैसे जीते?”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)

संक्षेप में शब्द ( धुनात्मक नाम) से मतलब अनाहत या अनहद शब्द है, वह शब्द जो प्रभु का पैदा किया हुआ है और जो बिना किसी साज, यंत्र आदि की सहायता के दिन रात निरंतर हर एक के अंदर हो रहा है। इस शब्द में – जो सतपुरूष का अपना ही विस्तार है – ध्वनिContinue reading “नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)”

नाम या शब्द भाग 3 (divine power)

नाम या शब्द भाग 3 (divine power) धुनात्मक नाम  अंतर में ध्वनि के रूप में आंतरिक कानों द्वारा सुने जाने वाले को धुनात्मक नाम कहते है। इसके अंदर एक और विशेषता होती है कि यह प्रकाश के रूप में अंतर की आंखो द्वारा दिखाई भी देता है। जिसे सुरत और नीरत का खुलना भी कहतेContinue reading “नाम या शब्द भाग 3 (divine power)”

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