संतों के गुण , कर्म और स्वभाव पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि बलिहारी जाएँ संतों पर , धन्य हैं संत क्योंकि जैसे कमल पानी में रहता है पर उसका फूल सदा पानी से ऊपर रहता है , उसी प्रकार संतजन संसार के बीच रहते हुए भी सबसे अलिप्त , निर्लेप रहते हैं ।Continue reading “संतो के गुण”
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!! नेत्रहीन संत !!
एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा। नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहलेContinue reading “!! नेत्रहीन संत !!”
गूंगे का गुड़
सन्तों – महात्माओं ने आन्तरिक सूक्ष्म रूहानी अनुभवों , रूहानी मण्डलों की स्थिति और परमात्मा से मिलाप के सहज ज्ञान और आनन्द को अकथ , अकह , ला – बयान कहा है । यह गूंगे का गुड़ है । जिस तरह गूंगा व्यक्ति गुड़ का स्वाद बयान नहीं कर सकता , उसी प्रकार इस सूक्ष्मContinue reading “गूंगे का गुड़”
नरकों और स्वर्गों को जला दो
सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”
बादशाह का ख़ाली हाथ
यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले और अपनी आत्मा को खो दे , तो उसे क्या लाभ होगा । सेंट मार्क महमूद ग़ज़नवी ने हिंदुस्तान पर सत्रह हमले किये और बहुत – सा धन – दौलत , सोना – चाँदी , हीरे रे – जवाहरात लूटकर ग़ज़नी ले गया । वह तुर्क थाContinue reading “बादशाह का ख़ाली हाथ”
झूठे वायदों की सज़ा
अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते है पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है । सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुतContinue reading “झूठे वायदों की सज़ा”
सबसे बड़ा कौन ?
गुरु और मालिक में कोई अंतर नहीं , दोनों वास्तव में एक ही हैं । महाराज सावन सिंह एक पादरी हमेशा बड़े महाराज जी के साथ बहस करता रहता था । एक बार जब आप ब्यास स्टेशन पर उतरे , तो वह बोला कि एक सवाल का जवाब दो । आपने कहा , ‘ बड़ीContinue reading “सबसे बड़ा कौन ?”
कबीर साहिब और रानी इन्दुमती
संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गयेContinue reading “कबीर साहिब और रानी इन्दुमती”
विरह – वेदना
प्रभात – वेला की इबादत और रात भर मालिक के वियोग में विलाप मालिक की प्राप्ति के ख़ज़ाने की कुंजी हैं । ख्वाजा हाफ़िज़ शेख शिबली एक दिन अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । सर्दी का मौसम था , आग जल रही थी । अचानक उनका ध्यान चूल्हे में जलती हुई लकड़ी के एकContinue reading “विरह – वेदना”
असली विद्वान कौन ?
मैं अपनी मूर्खता भरी बातें करनेवाली ज़बान से परमात्मा की भेद भरी बातों को बयान करने की हिम्मत नहीं कर सकता । अगर मैं हिम्मत करूँ तो भी बयान नहीं कर सकता । क्लाउड ऑफ़ अननोइंग एक बार एक विद्यार्थी अपनी बी . ए . की पढ़ाई पूरी करके अपने घर जा रहा था ।Continue reading “असली विद्वान कौन ?”