सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”
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सच्चा परोपकारी
गुलाम सदा घर में नहीं रहता ; परंतु पुत्र सदा रहता है । यदि ‘ पुत्र ‘ तुम्हें स्वतंत्र करेगा तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे । सेंट जॉन जेलखाने में कैदियों की बुरी हालत देखकर एक परोपकारी आता है और यह सोचकर कि इनको ठंडा पानी नहीं मिलता , दस – बीस बोरियाँ चीनीContinue reading “सच्चा परोपकारी”