जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जायें , तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा ।सेंट मैथ्यू कहा जाता है कि कबीर साहिब जब बाहर जाया करते थे तो एक आदमी उन्हें अकसर खेत में बैठा मिलता था । एक दिन कबीर साहिब ने उससे कहाContinue reading “जहाँ आसा तहाँ बासा”
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कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा
जब आप नौ दरवाज़ों को छोड़कर ब्रह्म , पारब्रह्म में जायेंगे तो आपको पता लग जायेगा कि गुरु क्या है और क्या देता है ।अगर अंदर जाकर देख लो तो यक़ीन पुख़्ता हो जायेगा ।महाराज सावन सिंह कबीर साहिब जुलाहा थे । राजा बीर सिंह राजपूत उनका सेवक था । उसका उनके साथ बहुत प्यारContinue reading “कबीर साहिब द्वारा राजा की परीक्षा”
नरकों और स्वर्गों को जला दो
सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”
सिकंदर महान की अंतिम इच्छा
मेरे आगे मैं खड़ा , ता भै रह्या लुकाइ । दादू परगट पीव है , जे यहु आपा जाइ ॥ संत दादू दयाल सिकंदरे – आज़म , जिसको विश्व विजयी कहते हैं , जब सारी दुनिया को जीतता हुआ भारत के उत्तर – पश्चिम में ब्यास नदी के पास आया , तो फ़ौज ने आगेContinue reading “सिकंदर महान की अंतिम इच्छा”
हमारे प्यार का खोखलापन
परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है ; मैं किससे डरूँ ? परमेश्वर मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ है , मैं किसका भय खाऊँ ? साम्ज़ एक बुढ़िया थी । उसकी एक जवान लड़की थी । इत्तफ़ाक़ से वह लड़की सख़्त बीमार हो गयी । बहुत इलाज करवाया लेकिन फ़ायदा न हुआ । बुढ़िया कहनेContinue reading “हमारे प्यार का खोखलापन”
कबीर साहिब और रानी इन्दुमती
संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गयेContinue reading “कबीर साहिब और रानी इन्दुमती”
भ्रंगी की सृजना
जिस नाम रिदै सो सभ ते ऊचा ॥ गुरु अर्जुन देव भ्रंगी के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है । कहा जाता है कि यह एक छोटे से बिल में अंडा देती है । फिर यह अपने लार्वे के लिए कोई कीड़ा ढूँढ़ लाती है । उस कीड़े को लार्वे के सामने रखकर बिलContinue reading “भ्रंगी की सृजना”
दुनिया के राज्य का मोल
गुरु से गुरु की ही माँग कीजिये , क्योंकि जब वह आपको यह बख्रिशश कर देते हैं तो फिर उनके साथ ही सारी चीजें मिल जाती हैं । महाराज सावन सिंह इब्राहीम अधम ने वर्ष अपने सतगुरु कबीर साहिब के चरणों में रहकर सेवा की और फिर उनका आशीर्वाद प्राप्त करके उनकी आज्ञा लेकर आपContinue reading “दुनिया के राज्य का मोल”
आदमी का उस्ताद आदमी
अंतर में सतगुरु से संपर्क बना रहने पर ही नाम का प्यार गिला जाग्रत होता है । दुनियादारों की संगति से हमारी सुरत फिर इंद्रियों में आ गिरती है । इसलिए गुरु की संगति या सत्संग परम आवश्यक है । गुरु के प्यार से हमें जगत का मोह छोड़ने और अंदर जाने की शक्ति प्राप्तContinue reading “आदमी का उस्ताद आदमी”
आग का मोल
अखी काढ धरी चरणा तल सभ धरती फिर मत पाई।।गुरु रामदास हटाता , वेश्या और छेड़ती । कहा जाता है कि शेख़ फ़रीद का एक शिष्य बहुत नेक – पाक था । जब वह बाज़ार जाता तो एक वेश्या उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए उससे मज़ाक़ किया करती । वह बेचारा दूसरी ओरContinue reading “आग का मोल”