क्या जीवन इन हड्डियों और मांस के शरीर से अधिक मूल्यवान नहीं ? और क्या शरीर पोशाक से अधिक आदर योग्य वस्तु नहीं ? सेंट मैथ्यू कबीर साहिब ने मगहर से काशी में रिहाइश कर ली थी और वहीं सत्संग करना शुरू कर दिया था । उनका उपदेश था कि मनुष्य को अपने अंदर हीContinue reading “जो कछु किया साहिब किया”
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नदी पार करने का मंत्र
यदि तुमको राई के दाने के बराबर भी विश्वास होता , तो तुम इस शहतूत के पेड़ से अगर कहते कि जड़ से उखड़कर समुद्र में लग जा , तो वह तुम्हारी मान लेता ।80 सेंट ल्यूक एक बार का ज़िक्र है , एक स्त्री किसी महापुरुष की सेवा किया करती थी । महात्मा काContinue reading “नदी पार करने का मंत्र”
भाई सुथरा और महात्मा की आग
– क्रोध में रूह फैलती है । जब क्रोध करो , आँखें लाल सुर्ख हो जाती हैं । रोम – रोम खड़ा हो जाता है , चेहरा और ही हो जाता है । यहाँ तक कि आदमी अक्ल से बेबहरा हो जाता है यानी संतुलन खो बैठता है । महाराज सावन सिंह गुरु अर्जुन साहिबContinue reading “भाई सुथरा और महात्मा की आग”
भेड़ों में शेर का बच्चा
रूहानी विज्ञान का उद्देश्य यही है कि मनुष्य माया के परदों से मुक्त होकर स्वयं को पहचान ले कि वह आत्मा है जो स्वयं चेतन है और महाचेतन के समुद्र का अंश है , ताकि वह उस महाचेतन सागर में मिल जाये …। महाराज सावन सिंह एक बार एक शेरनी बच्चे को जन्म देकर शिकारContinue reading “भेड़ों में शेर का बच्चा”
शरण का प्रताप
गुरु बिन तेरा और न कोई । धार बचन यह मन में ॥ स्वामी जी महाराज भागवत में एक कथा आती है कि एक बीमार और कमज़ोर बकरी अपने घर से भटककर दूर किसी घने जंगल में चली गयी । ख़तरे भरे इतने विशाल और घने जंगल में उस का बचाव करनेवाला कोई नहीं थाContinue reading “शरण का प्रताप”
धृतराष्ट्र का अंधा होना
जीव अपने सब सुख – दुःख प्रारब्ध कर्मों के अनुसार पाता है और मनुष्य जैसे भले – बुरे कर्म करता है , उनके अनुसार वैसे ही ऊँची – नीची योनियाँ भोगता है । महाराज सावन सिंह एक बार धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं अंधा क्यों हूँ । मुझे पिछले सौ जन्मों कीContinue reading “धृतराष्ट्र का अंधा होना”
अज्ञानी सूअर
उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला और सृष्टि की उपासना और सेवा की , न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है । रोमन्ज एक बार उद्धव ने भगवान कृष्ण से कहा कि इन जीवों को आप अपने देश क्यों नहीं ले चलते ? आप सर्वसमर्थ हैं और जो चाहें करContinue reading “अज्ञानी सूअर”
चोरियों की सूची
हे परमेश्वर , मुझ पर अनुग्रह कर , मुझ पर अनुग्रह कर , क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूँ ; और जब तक ये आपत्तियाँ निकल न जायें , तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूँगा । एक बार गुरु गोबिन्द सिंह जी चोरों के एक गाँव में गये और वहाँ के लोगोंContinue reading “चोरियों की सूची”
अंधा और भूलभुलैयाँ
कई जनम भए कीट पतंगा ॥ कई जनम गज मीन कुरंगा ॥ कई जनम पंखी सरप होइओ ॥ कई जनम हैवर ब्रिख जोइओ । मिल जगदीस मिलन की बरीआ ॥ चिरंकाल इह देह संजरीआ।। गुरु अर्जुन देव एक आदमी अंधा भी था और साथ ही गंजा भी था । थोड़ी सी ग़लती के कारण राजाContinue reading “अंधा और भूलभुलैयाँ”
सच्चा परोपकारी
गुलाम सदा घर में नहीं रहता ; परंतु पुत्र सदा रहता है । यदि ‘ पुत्र ‘ तुम्हें स्वतंत्र करेगा तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे । सेंट जॉन जेलखाने में कैदियों की बुरी हालत देखकर एक परोपकारी आता है और यह सोचकर कि इनको ठंडा पानी नहीं मिलता , दस – बीस बोरियाँ चीनीContinue reading “सच्चा परोपकारी”