मुर्दा खाने का हुक्म

अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”

चोर से कुतुब

यदि खुश्क पत्थर या संगमरमर है तो कामिल फकीर की सोहबत में जाने पर तू हीरा बन जायेगा ।67 हजरत अब्दुल कादिर जीलानी फ़ारस देश के बहुत कमाई वाले महात्मा थे । मुसलमानों में फकीरों के दर्जे होते हैं – कुतुब , गौस आदि । किसी जगह मौलाना रूम का क्रुतुब मर गया था ।Continue reading “चोर से कुतुब”

सच्चा शिष्य कौन ?

सच्चा शिष्य कौन ? सबद मरै सोई जन पूरा ॥ सतगुर आख सुणाए सूरा ॥72 गुरु अमरदास सत्ता और बलवंडा नामक दो पाठी थे । वे गुरु अर्जुन साहिब के दरबार में कीर्तन किया करते थे । उन्हें भ्रम हो गया कि उनके कीर्तन के कारण ही इतनी संगत जुड़ती है । इसी अभिमान नेContinue reading “सच्चा शिष्य कौन ?”

चौरासी लाख योनियों से मुक्ति

गुरू अर्जुन देव जी कहते है: लख चौरासी जोन सबाईं।। मानस कऊ प्रभ दी वडयाई।। इस पउड़ी ते जो नर चुके, सो आइ जाइ दुख पाईदा।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स १०७५) गुरू साहिब चेतावनी दे रहे है कि जो लोग प्रभु की अपार दया से मिले मनुष्य जन्म के अमूल्य अवसर को इन्द्रियों के भोगों,Continue reading “चौरासी लाख योनियों से मुक्ति”

सतगुरु

सतगुरु : सन्त – सतगुरु मालिक का नर – रूप अवतार है जिसके अन्दर सत्य प्रकट है और जो सत्य से अभेद है । उसके अन्दर सत्य रमा हुआ है । मालिक से मिलकर उसमें मालिक का तेज आ गया । वह पवित्र हस्ती है , उसमें सत्य ख़ुद देह – स्वरूप में प्रकट हैContinue reading “सतगुरु”

सत्संग का अर्थ

सत्संग : ‘ सत् ‘ का मतलब है ‘ सत्य ‘ या ‘ सच्च ‘ , ‘ जीवित ‘ या ‘ जाग्रत ‘ , और ‘ संग ‘ का मतलब है ‘ साथ ‘ या ‘ सोहबत ‘ , यानी सदा कायम रहनेवाले पुरुष की सोहबत या संगति का नाम सत्संग है । सतगुरु सत्Continue reading “सत्संग का अर्थ”

धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व

ग्रन्थों – पोथियों में महात्माओं की रूहानी मण्डलों की यात्रा का वर्णन और उनके निजी अनुभवों का उल्लेख है , जिनको हमारे मार्ग – दर्शन के लिए उन्होंने पुस्तकों में लिखा । हमारे दिल में उनके लिये इज़्ज़त है । उन्हें पढ़कर हमारे अन्दर किसी हद तक परमार्थ का शौक़ और मालिक से मिलने काContinue reading “धर्म – ग्रन्थों का महत्त्व”

सही लक्ष्य

सही लक्ष्य दुःख से बचने के लिए और परम सुख की प्राप्ति के लिए लोग अंधा – धुंध , जी – तोड़ कोशिश करते हैं , पर कोई प्राप्ति होती नज़र नहीं आती । लेकिन समझदार इनसान पुरुषार्थ के साथ – साथ सही लक्ष्य को भी अपने सामने रखता है । यदि लक्ष्य सही नContinue reading “सही लक्ष्य”

विरहिणी आत्मा

विरहिणी आत्मा (संत कबीर साहिब की बानी) वै दिन कब आबैंगे भाइ । जा कारनि हम देह धरी है , मिलिबौ अंगि लगाइ ॥ टेक ॥ हौं जानू जे हिल मिलि खेलूँ , तन मन प्रॉन समाइ । या काँमना करौ परपूरन , समरथ हौ राँम राइ ॥ माँहि उदासी माधौ चाहै , चितवत रैंनिContinue reading “विरहिणी आत्मा”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

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