सत्संग बड़ा है या तप

सत्संग बड़ा है या तप एक बार विश्वामित्र जी और वशिष्ठ जी में इस बात‌ पर बहस हो गई, कि सत्संग बड़ा है या तप?विश्वामित्र जी ने कठोर तपस्या करके ऋध्दि-सिध्दियों को प्राप्त किया था, इसीलिए वे तप को बड़ा बता रहे थे। जबकि वशिष्ठ जी सत्संग को बड़ा बता रहे थे।आखिर वे दोनों इसContinue reading “सत्संग बड़ा है या तप”

परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1

परमेश्वर तक पहुंचना कोई हंसी मजाक की बात नहीं।वह तो मानो किसी मजबूत किले में बैठा हुआ है और वह क़िला है मोटी पथरीली दीवारों और वज्र के मजबूत कपाटोवला। न दीवारे ढह सकती है, न कपाट ही टूटते है।इसलिए उसके अंदर जाने के लिए कोई उपाय नहीं बनता। हां, अगर एक सीढ़ी मिल जाए,Continue reading “परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1”

संत दरिया मारवाड़ वाले -16

मुरली कौन बजावै हो , गगन मँडल के बीच ॥ त्रिकुटी संगम होय कर , गंग जमुन के घाट । या मुरली के सब्द से , सहज रचा बैराट । गंग जमुन बिच मुरली बाजै , उत्तर दिस धुन होय। त उन मुरली की टेरहि सुनि सुनि , रहीं गोपिका मोहि ॥ जहँ अधर डालीContinue reading “संत दरिया मारवाड़ वाले -16”

मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3

कबीर साहिब हमारी पूरी अवस्था अपनी बानी के जरिए बयान कर रहे है जब लग तेल दीवे मुख बाती तब सुझे सभ कोई।। तेल जले बाती ठहरानी सुन्ना मंदर होई।। रे बावरे तुह घरी न राखै कोई।। तू राम नाम जप सोई।। का की मात पिता कहूं का को कवन पुरख की जोई।। घट फूटेContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3”

संत दरिया साहब की बाणी

चल सूवा । तेरे आद राज ‘ , पिंजरा में बैठा कौन काज ॥ बिल्ली का दुख दहै जोर , मारै पिंजरा तोर तोर ॥ मरने पहले मरी धीर , जो पाछे मुक्ता सहज छीर ।। सतगुरु सब्द हृदै में धार , सहजाँ सहजाँ करो उचार ॥ प्रेम प्रवाह धसै जब आभ , नाद प्रकासैContinue reading “संत दरिया साहब की बाणी”

हमारे लिए चेतावनी

कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62) संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझातेContinue reading “हमारे लिए चेतावनी”

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