ध्यान किसका करें तीन चीजों का ध्यान हमारे रूहानी सफ़र में हमारा सहायक हो सकता है : . परमात्मा का ध्यान नाम या शब्द का ध्यान जो परमात्मा का क्रियात्मक रूप है गुरु का ध्यान जो परमात्मा का प्रकट रूप है . हमारे जीवन का उद्देश्य मालिक को देखना है , उसका सिमरन और उसकाContinue reading “ध्यान किसका करें”
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गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा
संत महात्मा अपनी शरण में आए जीव को परमात्मा से मिलाप की मंजिल पर पहुंचने के लिए अंतर्मुख रूहानी अभ्यास की जो युक्ति सीखते है, उसे संत मत में नाम दान, गुरु मंत्र, गुरु उपदेश, गुरु का शब्द, गुरु का नाम, गुरु का वचन, गुरु की दीक्षा आदि नामों से जाना जाता है। इस दीक्षा,उपदेशContinue reading “गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा”
गुरु- ज्ञान, गुरुमत
गुरु- ज्ञान, गुरुमत या संत मत का अर्थ है – गुरुओं और संतो महात्माओं द्वारा बताया गया प्रभु की प्राप्ति का मार्ग या साधन है। संत महात्मा समझाते है कि जिस परमात्मा ने संसार को चलाने के सब नियम बनाए है, उसने अपने साथ मिलाप या मार्ग या साधन भी सृष्टि के आरम्भ में स्वयContinue reading “गुरु- ज्ञान, गुरुमत”
सिमरन कैसे करें
सिमरन कैसे करें मनुष्य जब मालिक का सिमरन लगातार , हर साँस के साथ किया जाता है , तो की चेतना जाग्रत होकर परमात्मा का अनुभव करती है । जिन सन्तों महात्माओं ने परमात्मा का अनुभव किया है , उसका साक्षात्कार किया है , उनके द्वारा दिये गये नाम का सिमरन अत्यन्त लाभदायक होता हैContinue reading “सिमरन कैसे करें”
सिमरन के रूप
सिमरन के रूप सिमरन संस्कृत के ‘ स्मृ ‘ धातु से बना है जिसका अर्थ है याद करना , किसी मन्त्र आदि को याद करना या बार – बार दोहराना । सिमरन में कई प्रकार के जाप शामिल हैं । कई लोग हाथों की अंगुलियों से , कई जबान से , कई कण्ठ से ,Continue reading “सिमरन के रूप”
बाहर मुखी साधना
संत दरिया मारवाड़ वाले बहुत से लोग पाठ पूजा, तीर्थ व्रत, दान पुण्य , घर बार त्याग कर जंगलों पहाड़ों में भटकना आदि बहार्मुखी क्रियाओं को भक्ति का साधन मान बैठते है। बाहरमुखी साधना के पीछे भाग रही दुनिया को सचेत करते हुए दरिया साहिब फरमाते है: दुनिया भरम बोराई । आतमराम सकल घट भीतरContinue reading “बाहर मुखी साधना”
अमृत वेला- Time of Nectar
ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”
दुनियाँ भरम भूल बौराई (संत दरिया)
दुनियाँ भरम भूल बौराई ।। आतम राम सकल घट भीतर जाकी सुद्ध न पाई । मथुरा कासी जाय द्वारिका , अरसठ तीरथ न्हावै । सतगुर बिन सोधा नहिं कोई , फिर फिर गोता खावै ॥ चेतन मूरत जड़ को सेवै बड़ा थूल मत गैला । देह अचार किया कहा होई , भीतर है मन मैलाContinue reading “दुनियाँ भरम भूल बौराई (संत दरिया)”
A Divine warning
Kabir Sahib warns: What to do, Kabir sleeps, wake up and chant. One day is Sovna, long pav pasar. (Kabir Sakhi Collection Page 62) Saints Mahatmas have given many types of warnings to the man calling him with many names like Gafil, unconscious, stupid, ignorant, Bavra etc. The first thing Mahatma explains to us isContinue reading “A Divine warning”
आंतरिक मार्ग
अगर हमें अपने घर के अन्दर जाना हो तो सबसे पहले घर के दरवाजे की तलाश करनी पड़ती है । निज – घर का वह दरवाजा आँखों के पीछे तीसरी आँख , एक आँख या तीसरा तिल है । उसी को खोलने के लिए हम उसको खटखटाते हैं यानी बार – बार सिमरन और ध्यानContinue reading “आंतरिक मार्ग”