चिन्ता सर्वव्यापक रोग है। सारा संसार चिंतारूपी आग में जल रहा है। गुरू नानक देव जी कहते है” चिंतत ही दिसे सभ कोई।।” (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ९३२) गुरु अर्जुन देव जी कहते है ” जिस गृह बहुत तिसे गृह चिंता।। जिस गृह थोरी सु फिरे भ्रमंता।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स १०१९) किसी को पैसाContinue reading “चिंता- चिता बराबर”
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गूंगे का गुड़
संतो महात्माओं ने अंतर में सूक्ष्म रूहानी अनुभवों, रूहानी मंडलो की स्थिति और परमात्मा से मिलाप के सहज ज्ञान और आनंद को अकथ, अकह, ला बयान कहा है। यह गूंगे का गुड़ है। जिस तरह गूंगा व्यक्ति गुड़ के स्वाद बयान नहीं कर सकता, उसी प्रकार इस सूक्ष्म अनुभव को स्थूल इन्द्रियों के स्तर परContinue reading “गूंगे का गुड़”
ध्यान किसका करें
ध्यान किसका करें तीन चीजों का ध्यान हमारे रूहानी सफ़र में हमारा सहायक हो सकता है : . परमात्मा का ध्यान नाम या शब्द का ध्यान जो परमात्मा का क्रियात्मक रूप है गुरु का ध्यान जो परमात्मा का प्रकट रूप है . हमारे जीवन का उद्देश्य मालिक को देखना है , उसका सिमरन और उसकाContinue reading “ध्यान किसका करें”
गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा
संत महात्मा अपनी शरण में आए जीव को परमात्मा से मिलाप की मंजिल पर पहुंचने के लिए अंतर्मुख रूहानी अभ्यास की जो युक्ति सीखते है, उसे संत मत में नाम दान, गुरु मंत्र, गुरु उपदेश, गुरु का शब्द, गुरु का नाम, गुरु का वचन, गुरु की दीक्षा आदि नामों से जाना जाता है। इस दीक्षा,उपदेशContinue reading “गुरू मंत्र, नामदान या दीक्षा”
गुरु- ज्ञान, गुरुमत
गुरु- ज्ञान, गुरुमत या संत मत का अर्थ है – गुरुओं और संतो महात्माओं द्वारा बताया गया प्रभु की प्राप्ति का मार्ग या साधन है। संत महात्मा समझाते है कि जिस परमात्मा ने संसार को चलाने के सब नियम बनाए है, उसने अपने साथ मिलाप या मार्ग या साधन भी सृष्टि के आरम्भ में स्वयContinue reading “गुरु- ज्ञान, गुरुमत”
सिमरन कैसे करें
सिमरन कैसे करें मनुष्य जब मालिक का सिमरन लगातार , हर साँस के साथ किया जाता है , तो की चेतना जाग्रत होकर परमात्मा का अनुभव करती है । जिन सन्तों महात्माओं ने परमात्मा का अनुभव किया है , उसका साक्षात्कार किया है , उनके द्वारा दिये गये नाम का सिमरन अत्यन्त लाभदायक होता हैContinue reading “सिमरन कैसे करें”
बाहर मुखी साधना
संत दरिया मारवाड़ वाले बहुत से लोग पाठ पूजा, तीर्थ व्रत, दान पुण्य , घर बार त्याग कर जंगलों पहाड़ों में भटकना आदि बहार्मुखी क्रियाओं को भक्ति का साधन मान बैठते है। बाहरमुखी साधना के पीछे भाग रही दुनिया को सचेत करते हुए दरिया साहिब फरमाते है: दुनिया भरम बोराई । आतमराम सकल घट भीतरContinue reading “बाहर मुखी साधना”
चेतना का स्तर
ऐ मानव ! तू कब तक घड़े के बाहरी साँचे – ढाँचे और सजावट से मोहित होकर भ्रम में पड़ा रहेगा ? इनसे हटकर , घड़े के अन्दर जो पानी है उसकी ओर दृष्टि डाल । तू कब तक बाहरी सूरतों पर मोहित होता रहेगा ? हक़ीक़त का खोजी बन और हक़ीक़त की तलाश करContinue reading “चेतना का स्तर”
अमृत वेला- Time of Nectar
ग्रंथो शास्त्रों में सुबह सवेरे यानी रात के पिछले पहर को अमृत वेला, ब्रह्म मुहूर्त, ब्रह्म घड़ी आदि कहा गया है। परमेश्वर के भक्तों ने अमृत वेला को भक्ति के लिए खास तौर से लाभदायक माना है। सुबह का वातावरण भक्ति के लिए बहुत उत्तम होता है। सबह के समय रात भर सोने के बादContinue reading “अमृत वेला- Time of Nectar”
अमृत कैसे प्राप्त होगा
अमृत का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि जिसके सेवन से हम अमर हो जाय । सूफी फकीरो ने इसे ‘ आबे हयात’ यानी अमर जीवन प्रदान करने वाला जल कहा है। यह संसार, इसके सब पदार्थ और रिश्ते- नाते नाशवान है यानी एक दिन सबको खत्म हो जाना है। सारी त्रिलोकी मृत्यु और विनाशContinue reading “अमृत कैसे प्राप्त होगा”