मम कारण सब परिहरै , आपा अभिमान । सदा अखंडित उर धरै , बोलै भगवान ।। संत दादू दयाल एक फ़क़ीर का नियम था कि वह जिस गाँव में जाता था , रोटी ऐसे व्यक्ति के घर खाता था जिसकी कमाई हक़ की होती थी । वह पहले पूछताछ कर लेता था । एक दिनContinue reading “फ़क़ीर और साहूकार”
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तीर्थ आद्यात्म की नजर से
संत महात्मा प्रभु की प्राप्ति के लिए मन की निर्मलता का उपदेश देते है। हम इसके लिए आसान से आसान साधन ढूंढने की कोशिश करते है। हम समझते है कि तीर्थो में स्नान करने से मन निर्मल हो जाएगा और हम प्रभु मिलाप करने में सफल हो जायेगे। पर ऐसा सोचना ठीक नहीं है। तीर्थContinue reading “तीर्थ आद्यात्म की नजर से”
जाति- पाति आध्यात्म की नजर से
संतो महात्माओं ने हमेशा से एकता का उपदेश दिया है। वे हमको हर प्रकार के द्वैत से ऊपर उठकर समदर्शी बनने का उपदेश देते है। संत महात्मा समझाते है कि परमात्मा ने सब इंसान एक जैसे बनाए है। मजहब, मुल्क, कोम, नस्ल और जाति पाति के सब तरह के भेद भाव इंसान के बनाए हुएContinue reading “जाति- पाति आध्यात्म की नजर से”
ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…
ज्योतिष द्वारा लोग भविष्य में घटनेवाली शुभ और अशुभ घटनाओं का पता लगाने का प्रयत्न करते है।लोग ज्योतिष विद्या द्वारा यह जानने का प्रयत्न करते है कि किस काम के लिए कौन सी घड़ी या कोन सा मुहूर्त शुभ है। इसी तरह वे यह जानने की भी कोशिश करते है कि किन स्थानों पर जानाContinue reading “ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…”
प्रेम की मस्ती
ऐसे प्रेमी , सतगुरु के प्रेम और मुहब्बत में फ़ना होकर ( अपने आप को पूर्णतया खोकर ) अमर जीवन का रस पीते हैं और उसका आनंद प्राप्त करते हैं । महाराज सावन सिंह एक बार जब कृष्ण जी विदुर के घर गये , उस समय वह घर पर नहीं थे । उनकी पत्नी नहाContinue reading “प्रेम की मस्ती”
लफ़्ज़ों का फेर
गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज ने ‘ जाय साहिब ‘ में मालिक के हजार से अधिक नाम बताये हैं । पर वे केवल नामों के तात्पर्य को ग्रहण करने का आदेश देते हैं और कहते हैं कि तुम नामों से चलकर उस नामी को पकड़ो जो सबका इष्ट है । महाराज सावन सिंह चार अलगContinue reading “लफ़्ज़ों का फेर”
माँ की शिक्षा
अपने अंदर प्रियतम के सिवाय और कोई चाह न रखो । भक्त और भगवान के बीच किसी दूसरे का ख़याल तक बाक़ी न रहे । मौलाना रूम कहा जाता है कि जब प्राचीन भारत के एक राजा गोपीचंद ने दुनिया की ऐशो – इशरत से तंग आकर अपना राज्य छोड़ दिया और गोरखनाथ के पासContinue reading “माँ की शिक्षा”
मुर्दा खाने का हुक्म
अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”
इंद्र का तीर – कमान
जेती लहरि समंद की , तेते मनहिं मनोरथ मारि । बैसै सब संतोष करि , गहि आतम एक बिचारि।।56 संत दादू दयाल एक ऋषि ने इतनी तपस्या की कि स्वर्ग के राजा इंद्र को डर लगने लगा कि कहीं ऋषि उसका सिंहासन न छीन ले । वह हाथ में तीर – कमान लेकर शिकारी काContinue reading “इंद्र का तीर – कमान”
चोर से कुतुब
यदि खुश्क पत्थर या संगमरमर है तो कामिल फकीर की सोहबत में जाने पर तू हीरा बन जायेगा ।67 हजरत अब्दुल कादिर जीलानी फ़ारस देश के बहुत कमाई वाले महात्मा थे । मुसलमानों में फकीरों के दर्जे होते हैं – कुतुब , गौस आदि । किसी जगह मौलाना रूम का क्रुतुब मर गया था ।Continue reading “चोर से कुतुब”