गुरु समान दूसर नहिं कोय

प्रभुरूपी सत्य के सार की कल्पना भी असंभव है । उस परम मित्र का वर्णन कोई कैसे कर सकता है जिसके समान कोई दूसरा है ही नहीं।। मौलाना रूम जब शुकदेव गुरु धारण करके , नाम लेकर उनके आदेशानुसार कमाई करके अपने पिता वेदव्यास के पास गया , तो उन्होंने पूछा , ‘ गुरु कैसाContinue reading “गुरु समान दूसर नहिं कोय”

तीर्थ आद्यात्म की नजर से

संत महात्मा प्रभु की प्राप्ति के लिए मन की निर्मलता का उपदेश देते है। हम इसके लिए आसान से आसान साधन ढूंढने की कोशिश करते है। हम समझते है कि तीर्थो में स्नान करने से मन निर्मल हो जाएगा और हम प्रभु मिलाप करने में सफल हो जायेगे। पर ऐसा सोचना ठीक नहीं है। तीर्थContinue reading “तीर्थ आद्यात्म की नजर से”

जाति- पाति आध्यात्म की नजर से

संतो महात्माओं ने हमेशा से एकता का उपदेश दिया है। वे हमको हर प्रकार के द्वैत से ऊपर उठकर समदर्शी बनने का उपदेश देते है। संत महात्मा समझाते है कि परमात्मा ने सब इंसान एक जैसे बनाए है। मजहब, मुल्क, कोम, नस्ल और जाति पाति के सब तरह के भेद भाव इंसान के बनाए हुएContinue reading “जाति- पाति आध्यात्म की नजर से”

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