विरह – वेदना

प्रभात – वेला की इबादत और रात भर मालिक के वियोग में विलाप मालिक की प्राप्ति के ख़ज़ाने की कुंजी हैं । ख्वाजा हाफ़िज़ शेख शिबली एक दिन अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । सर्दी का मौसम था , आग जल रही थी । अचानक उनका ध्यान चूल्हे में जलती हुई लकड़ी के एकContinue reading “विरह – वेदना”

संतों के सामने घमंड

होह सभना की रेणुका तउ आउ हमारे पास ॥131 गुरु अर्जुन देव शेख़ फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रूहानियत की गहरी लगन थी । उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था जो राजस्थान के एक शहर अजमेर में रहते थे । उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुँचे तो देखा किContinue reading “संतों के सामने घमंड”

असल सुख को पाने का तरीका

आज एक सुखद अहसास हुआ जब ये वीडियो देखा। शायद हमारे में ही कमी है जो सिर्फ हम अपना ही सुख देखते है। इसलिए दुखी है। अगर हम दुसरो को सुख बाटेंगे तो ये बात तो पक्की है कि हम कभी दुखी नहीं होंगे। इसीलिए संत महात्मा कहते है कि अपनी कमाई का 10 वाContinue reading “असल सुख को पाने का तरीका”

परमात्मा की नजर में सब बराबर है..

जब – जब महात्मा संसार में आते हैं , वे संसार को यही उपदेश देते हैं कि सब इनसान मालिक ने पैदा किये हैं , इसलिए सब बराबर हैं । अगर दुनियावी परमात्मा की नजर में सब बराबर हैं नजर से विचार करें , तो भी मूल रूप से सब समान हैं – चाहे वेContinue reading “परमात्मा की नजर में सब बराबर है..”

मनुष्य धर्म

परमात्मा ने मनुष्य बनाये धर्मों की स्थापना बाद में हुई । मनुष्य धर्म के लिए नहीं बनाये गये थे , लेकिन धर्म मनुष्य की आत्मिक उन्नति के लिए बनाये गये थे ताकि वे उस परम आनन्द का अनुभव कर सकें जो केवल परमात्मा से मिलाप करने पर होता है । आजकल नयी सुविधाओं , भौतिकContinue reading “मनुष्य धर्म”

जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

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