
कबीर साहिब चेतावनी देते है: कबीर सोता क्या करें, उठ के जपो दयार। एक दिना है सोवना,लंबे पाव पसार।। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 62)
संतो महात्माओं ने मनुष्य को गाफिल, अचेत, मूर्ख, अज्ञानी, बावरा आदि कई नामों से पुकारते हुए उसको अनेक प्रकार की चेतावनी दी है। सबसे पहली बात महात्मा हमे यह समझाते है कि हम संसार में अपने आप नहीं आए, हमारे मालिक ने हमे संसार में एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए भेजा है। वह उद्देश्य प्रभु भक्ति द्वारा अपनी आत्मा को परमात्मा में लीन करके पूर्ण ज्ञान और पूर्ण आनंद को भुलाकर इंसान जो भी कार्य मन मर्जी से करता है, वे उसे कर्म और फल तथा आवागमन के दुखदाई चक्र से बांध देते है।
दूसरी चेतावनी महात्मा यह देते है कि दृश्यमान संसार काल और माया की रचना है। इसके सभी पदार्थ और रिश्ते, इन्द्रियों के भोग, सांसारिक मान बड़ाई आदि सब झूठे और नाशवान है। इनमे से कभी किसी को सच्चा और पूर्ण सुख प्राप्त नहीं हो सकता।
तीसरी चेतावनी महात्मा यह देते है कि जीवन क्षण भर है मृत्यु अटल है। जीवन का कोई भरोसा नहीं है। पता नहीं मौत किस समय और कहा आ जाए? इसीलिए जीवन के मूल उद्देश्य की प्राप्ति में भूल या देर नहीं करनी चाहिए। हमे प्रभु भक्ति और नाम की कमाई द्वारा जल्दी से जल्दी अपना असल उद्देश्य पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि इसी में हमारा अपना ही भला है।
महात्मा हमे चेतावनी देते है कि हमारा अपने सगे संबंधियों और दोस्त यारो यहां तक कि दुश्मन से भी हमारा लेन देन का सम्बन्ध है। ये सब रिश्ते पिछले कर्मो के आधार पर बनते और बिगड़ते रहते है। न कभी कोई किसी के साथ आया है और ना ही कोई किसी के साथ जा सकता है। संत महात्मा हमे इन्हे निभाने के लिए मना नहीं करते है वो तो हमे सिर्फ इनकी सीमा बयान करते है ऐसा नहीं की ये रिश्ते निभाने नहीं है इनको हमे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाने है क्योंकि इनके साथ हमारे कर्म है। कर्मो का लेन देन पूरा करना है। पर हम संसार के रिश्तों में उलजकर अपने सच्चे रिश्तेदार, उस परमपिता परमात्मा मिलाप के कार्य में देर करते रहते है। अपने असल काम को भूल जाते है।
कबीर साहिब की फरमाते है: आज कहे मै काल भजूगा, काल कहे फिर काल। आज काल के करत ही, औसर जासी चाल। (कबीर साखी संग्रह पृष्ठ स 57)
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