नरकों और स्वर्गों को जला दो

सुरग मुकति बैकुंठ सभ बांछह नित आसा आस करीजै । हर दरसन के जन मुकति न मांगह मिल दरसन त्रिपत मन धीजै।। गुरु रामदास एक दिन बसरा की महात्मा राबिया बसरी फूट – फूटकर रो रही थी , मानो उसका हृदय फट रहा हो । उसको दुःख से व्याकुल देखकर उसके पड़ोसी उसके चारों ओरContinue reading “नरकों और स्वर्गों को जला दो”

परमात्मा से प्रार्थना

” मेरे मालिक, मै बिलकुल नादान हूं, मै नहीं जानता तुझसे क्या मांगू? जो तू मेरे लिए उचित समझे वहीं दे दे और मुझे वो शक्ति और बुद्धि बक्ष कि जो कुछ तू दे या जहां और जैसे तू रखे उसी में मै सदा खुश रहूं । मुझमें कोई गुण नहीं, कोई भक्ति नहीं। मेरेContinue reading “परमात्मा से प्रार्थना”

गुरु समान दूसर नहिं कोय

प्रभुरूपी सत्य के सार की कल्पना भी असंभव है । उस परम मित्र का वर्णन कोई कैसे कर सकता है जिसके समान कोई दूसरा है ही नहीं।। मौलाना रूम जब शुकदेव गुरु धारण करके , नाम लेकर उनके आदेशानुसार कमाई करके अपने पिता वेदव्यास के पास गया , तो उन्होंने पूछा , ‘ गुरु कैसाContinue reading “गुरु समान दूसर नहिं कोय”

पपीहे का प्रण

मी जिउ चात्रिक जल प्रेम पिआसा ॥ जिउ मीना जल माहे उलासा ॥ नानक हर रस पी त्रिपतासा।। गुरु नानक एक दिन कबीर साहिब गंगा के किनारे घूम रहे थे । उन्होंने देखा कि एक पपीहा प्यास से निढाल होकर नदी में गिर गया है । पपीहा स्वाति बूंद के अलावा दूसरा पानी नहीं पीताContinue reading “पपीहे का प्रण”

बादशाह का ख़ाली हाथ

यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले और अपनी आत्मा को खो दे , तो उसे क्या लाभ होगा । सेंट मार्क महमूद ग़ज़नवी ने हिंदुस्तान पर सत्रह हमले किये और बहुत – सा धन – दौलत , सोना – चाँदी , हीरे रे – जवाहरात लूटकर ग़ज़नी ले गया । वह तुर्क थाContinue reading “बादशाह का ख़ाली हाथ”

बेदाग दाढ़ी

मन हमारा दुश्मन है और इसे दुश्मन समझते हुए इसकी हरकतों पर चौकीदारी करनी चाहिए । महाराज सावन सिंह एक स्त्री थी । उसके रिश्तेदारों में एक अच्छा कमाई वाला महात्मा था । कुछ तो कमाई और कुछ बेफ़िक्री और बेपरवाही के फलस्वरूप उसके चेहरे पर हमेशा रौनक़ और ख़ुशी रहती थी । उसकी शोभायमानContinue reading “बेदाग दाढ़ी”

झूठे वायदों की सज़ा

अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते है पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है । सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुतContinue reading “झूठे वायदों की सज़ा”

फिर कभी जलेबी मत माँगना

साकत नर प्रानी सद भूखे नित भूखन भूख करीजै ॥ गुरु रामदास ज़िक्र है कि एक मुसलमान फ़क़ीर एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था । रास्ते में एक हलवाई की दुकान थी । उसने बड़ी अच्छी जलेबियाँ सजाकर रखी हुई थीं । मन ने कहा कि जलेबियाँ खानी हैं । पास पैसा था नहींContinue reading “फिर कभी जलेबी मत माँगना”

भूत

एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया औरउसे बेचने शहर गया।संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई।सेठ ने उससे पूछा – भाई ! यह क्या है ?उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है।इसमें अपार बल है।कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो,यह एक पल में निपटा देता है।यह कई वर्षों का काम मिनटों मेंContinue reading “भूत”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

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