सच्चा नाम क्या है ?

नाम नाम सब कहत है नाम न पाया कोय ||1|| परमात्मा का नाम तो सब जपते है पर किसी को भी नाम (परमात्नमा) हीं मिला है ?   अब हमें यह इस बात पर विचार करना है कि कोनसा नाम हम जपते है ? और उसको जपने से हमें कोनसा नाम नही मिला ?  हम सबContinue reading “सच्चा नाम क्या है ?”

सेवा से फायदा ही फायदा है।

मुलतान का एक मशहूर और भक्त कारीगर निज़ामुद्दीन ब्यास सतसंग घर को बहुत ही लगन प्यार से बनाने में लगा रहा। हज़ूर जब भी उसे अपनी मजदूरी लेने को कहते तो कहता कि काम खत्म होने पर इकट्ठी ले लूंगा। जब काफी महीने बीत गये तो हजूर जी ने फिर मजदूरी लेने को कहा। निज़ामुद्दीनContinue reading “सेवा से फायदा ही फायदा है।”

मन की उत्पत्ति और स्वभाव।

हंसा मन की वृति कछु लखि न परै , कहि न जात कछु हरे हरे ॥ टेक ॥ 1 ॥ पांच तत्व मन मनहि तीन गुण , मन के रूप तेहुं लोक खरे ॥ 2 ॥ मन मसजिद अरु मनहि देवहरा , मनहिं देव मन सेव करै ॥ 3 ॥ पाप पुन्य मन आवागवन मनContinue reading “मन की उत्पत्ति और स्वभाव।”

भगवान का जन्मदिन

एक छोटी-सी कहानी : अत्यंत काल्पनिक कहानी है लेकिन विचार करने जैसी है। शायद उपयोग की हो।मैंने सुना है, एक मुसलमान सूफी फकीर ने एक रात्रि स्वप्न देखा कि वह स्वर्ग में पहुंच गया है और उसने वहां यह भी देखा कि स्वर्ग में बहुत बड़ा समारोह मनाया जा रहा है। सारे रास्ते सजे हैं।Continue reading “भगवान का जन्मदिन”

संस्कृत के 52 अक्षर

संस्कृत के 52 अक्षर हैं जो हमारे शरीर के छः चक्रों के कमलों से निकले हैं , इसलिए इनको देववाणी कहा गया है । इनका विवरण चक्रों के नाम, कमल दल की संख्या और उनके स्वामी धनी इस प्रकार है:- ( 1 ) मूलाधार में 4 दल कमल, उसका स्वामी गणेश है। ( 2 ) स्वाधिष्ठानContinue reading “संस्कृत के 52 अक्षर”

पूर्ण गुरु की क्या निशानी है?

चौपाई सोई गुरू पूरा कहलावै । दुइ अक्षर का भेद लखावै ॥1 ॥ एक छुड़ावै एक मिलावै । तब निःशंक निज घर पहुँचावै ॥2 ॥ सो गुरू बंदीछोर कहावै । बंदी छोरि के जिव मुक्तावै ॥3 ॥ पूर्ण गुरु की क्या निशानी है ? पूर्ण गुरु वह है , जो लिखने , पढ़ने , बोलनेContinue reading “पूर्ण गुरु की क्या निशानी है?”

संतो के गुण

संतों के गुण , कर्म और स्वभाव पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि बलिहारी जाएँ संतों पर , धन्य हैं संत क्योंकि जैसे कमल पानी में रहता है पर उसका फूल सदा पानी से ऊपर रहता है , उसी प्रकार संतजन संसार के बीच रहते हुए भी सबसे अलिप्त , निर्लेप रहते हैं ।Continue reading “संतो के गुण”

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