संस्कृत के 52 अक्षर कहां से आए?

संस्कृत के 52 अक्षर हैं जो हमारे शरीर के छः चक्रों के कमलों से निकले हैं , इसलिए इनको देववाणी कहा गया है । इनका विवरण चक्रों के नाम, कमल दल की संख्या और उनके स्वामी धनी इस प्रकार है:- ( 1 ) मूलाधार में 4 दल कमल, उसका स्वामी गणेश है। ( 2 ) स्वाधिष्ठानContinue reading “संस्कृत के 52 अक्षर कहां से आए?”

आत्माएँ तीन प्रकार की हैं

आत्माएँ तीन प्रकार की हैं , ( 1 ) नित्यमुक्त आत्माएँ – जो कभी बंधन में नहीं रही तथा सदैव परमात्मा के साथ रहती हैं । ( 2 ) मुक्त आत्माएँ – जो कभी संसार – चक्र का हिस्सा थीं , परंतु अब मुक्त होकर परमात्मा के साथ बहती हैं । ( 3 ) बद्धContinue reading “आत्माएँ तीन प्रकार की हैं”

गायत्री मंत्र का अर्थ

तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ हम उस भव्य ज्योतिर्मय स्वरूप का ध्यान करें , जिसने सकल सृष्टि की उत्पत्ति की है । वह हमारी बुद्धि को अंधकार से प्रकाश की ओर प्रेरित करे । ऋग्वेद 3.62.10

सत्य या परमात्मा को जानने के लिए

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया । उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥ किसी आध्यात्मिक गुरु के पास जाकर , सत्य को जानने का प्रयत्न करो । पूरी विनम्रता के साथ उनसे शंका – समाधान करो , उनकी सेवा करो । केवल आत्मज्ञानी ही तुम्हें ज्ञान दे सकते हैं , क्योंकि वे स्वयं सत्य का अनुभव कर चुकेContinue reading “सत्य या परमात्मा को जानने के लिए”

ध्यान किसका करें

ध्यान किसका करें तीन चीजों का ध्यान हमारे रूहानी सफ़र में हमारा सहायक हो सकता है : . परमात्मा का ध्यान नाम या शब्द का ध्यान जो परमात्मा का क्रियात्मक रूप है गुरु का ध्यान जो परमात्मा का प्रकट रूप है . हमारे जीवन का उद्देश्य मालिक को देखना है , उसका सिमरन और उसकाContinue reading “ध्यान किसका करें”

परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है

परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका रिज्क (खाना पीना )नहीं बन्द करता और न ही जीव को कोई दुख देता है और न ही सूर्य को आज्ञा देता है कि इसके आंगन को रोशनी नहीं देना । बल्कि परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका वो वक्त छिनContinue reading “परमात्मा जब किसी से नाराज़ होता है”

असल गुरु की पहचान

गुर पीर सदाए मंगण जाए ॥ ता कै मूल न लगीऐ पाए ॥ घाल खाए किछ हथहो दे ॥ नानक राह पछाणह से ॥ जो गुरु और पीर अपने शिष्यों – सेवकों से माँगते फिरते हैं , उनके पैरों पर माथा ही नहीं टेकना चाहिए । कैसे महात्मा को ढूँढ़ना है ? जो स्वयं मेहनतContinue reading “असल गुरु की पहचान”

राम कहा हैं?

चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”

करना क्या है? कर क्या रहे है?

धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”

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