धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”
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रामायण
रामायण…‘रा’ का अर्थ है प्रकाश, ‘मा’ का अर्थ है मेरे भीतर, यानी रामा का अर्थ है मेरे भीतर का प्रकाश। दशरथ और कौसल्या ने राम का जन्म दिया। दशरथ का अर्थ है 10 रथ। दस रथ 5 इन्द्रिय अंगों (ज्ञानेंद्रिय) और 5 क्रिया अंगों (कर्मेन्द्रिय) के प्रतीक हैं। कौशल्या का अर्थ है कौशल। 10 रथोंContinue reading “रामायण”
ज्योतिष आद्यात्म की नजर से…
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ध्यान में मौत का उत्सव
एक साधु जीवनभर इतना प्रसन्न था कि लोग हैरान थे। लोगों ने कभी उसे उदास नहीं देखा, कभी पीड़ित नहीं देखा।उसके शरीर छोड़ने का वक्त आया और उसने कहा कि अब मैं तीन दिन बाद मर जाऊंगा। यह मैं इसलिए बता रहा हूं कि जो आदमी जीवन भर हंसता था, उसकी मौत पर कोई रोएContinue reading “ध्यान में मौत का उत्सव”
अनमोल वचन
हमारी प्रार्थनाएँ और अरदासें व्यर्थ हैं , जब तक कि हम अपनी ओर से द्वार खोलने की पूरी कोशिश के द्वारा उन्हें सबल नहीं बनाते । सतगुरु जानते हैं कि नाम के लिए हमारी इच्छा और प्यास दिखावटी है । हमारी प्रार्थनाएँ निष्कपट और सच्ची नहीं हैं । हमारा मन अभी भी दुनिया और उसकेContinue reading “अनमोल वचन”