नाम नाम सब कहत है नाम न पाया कोय ||1|| परमात्मा का नाम तो सब जपते है पर किसी को भी नाम (परमात्नमा) हीं मिला है ? अब हमें यह इस बात पर विचार करना है कि कोनसा नाम हम जपते है ? और उसको जपने से हमें कोनसा नाम नही मिला ? हम सबContinue reading “सच्चा नाम क्या है ?”
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आत्माएँ तीन प्रकार की हैं
आत्माएँ तीन प्रकार की हैं , ( 1 ) नित्यमुक्त आत्माएँ – जो कभी बंधन में नहीं रही तथा सदैव परमात्मा के साथ रहती हैं । ( 2 ) मुक्त आत्माएँ – जो कभी संसार – चक्र का हिस्सा थीं , परंतु अब मुक्त होकर परमात्मा के साथ बहती हैं । ( 3 ) बद्धContinue reading “आत्माएँ तीन प्रकार की हैं”
राम कहा हैं?
चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”
मन का शिकार – उसे वश में करना
एक ग्रामीण शिकारी के जीवन पर आधारित यह पद मन को वश में करने का सुझाव देता है । शिकार पर जाते हुए पति से शिकारी की पत्नी कहती है कि हे पतिदेव , किसी जीवित प्राणी की हत्या न करना , परन्तु मरा हुआ , रक्त तथा मांस से हीन शिकार लेकर भी घरContinue reading “मन का शिकार – उसे वश में करना”
जहाँ आसा तहाँ बासा
जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जायें , तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा ।सेंट मैथ्यू कहा जाता है कि कबीर साहिब जब बाहर जाया करते थे तो एक आदमी उन्हें अकसर खेत में बैठा मिलता था । एक दिन कबीर साहिब ने उससे कहाContinue reading “जहाँ आसा तहाँ बासा”
मालिक कैसे दया करता है ?
सतगुरु के बिना हकीक़त का भेद नहीं खुल सकता , न कोई मन – माया के बंधनों से छूट सकता है और बिना शब्द के न कोई मालिक से मिल सकता है । केवल सतगुरु ही सुरत को शब्द के साथ जोड़ता है । महाराज सावन सिंह गुरु अमरदास जी के समय का वृत्तांत हैContinue reading “मालिक कैसे दया करता है ?”
व्यर्थ गयी कमाई
जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह ॥ गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह सेContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”
भजन – सुमिरन का महत्त्व
जो गुरु का भक्त है वह चाहे कैसा भी है , लेकिन गुरु उसे नरकों में नहीं जाने देता । महाराज सावन सिंह जब राजा जनक स्थूल शरीर को त्यागकर अपने धाम की ओर जा रहे थे , रास्ते में क्या देखते हैं कि नरकों में जीव जल रहे हैं और चीख – पुकार करContinue reading “भजन – सुमिरन का महत्त्व”
काला नूर
जो नाम लेकर रख छोड़े , उसे फ़ायदा कुछ नहीं । जिस तरह किसी कुम्हार को हीरा मिल गया , उसने गधे के गले में बाँध दिया , कद्र नहीं की ।महाराज सावन सिंह एक मिरासी ग़लती से मसजिद में जा पहुँचा । वहाँ पाँच नमाज़ी मौजूद थे । उन्होंने कहा कि आओ , वुजूContinue reading “काला नूर”
किसका सेवक ?
कुटुम्ब परिवार मतलब का । बिना धन पास नहिं आई।।स्वामी जी महाराज गुरु गोबिन्द सिंह जी का दरबार लगा हुआ था । सिक्खी का मज़मून चल रहा था । गुरु साहिब ने कहा कि गुरु का शिष्य कोई – कोई है , बाक़ी सब अपने मन के गुलाम हैं या स्त्री और बच्चों के गुलामContinue reading “किसका सेवक ?”