कर्मों के उत्तराधिकारी

गांव-देहात में एक कीड़ा पाया जाता है, जिसे गोबरैला कहा जाता है। उसे गाय, भैंसों के ताजे गोबर की बू बहुत भाती है! वह सुबह से गोबर की तलाश में निकल पड़ता है और सारा दिन उसे जहां कहीं गोबर मिल जाता है, वहीं उसका गोला बनाना शुरू कर देता है। शाम तक वह एकContinue reading “कर्मों के उत्तराधिकारी”

राम कहा हैं?

चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी कहते हैं : कासट मह जिउ है बैसंतर मथ संजम काट कढीजै । राम नाम है जोत सबाई तत गुरमत काढ लईजै ॥ जिस तरह लकड़ी के अंदर अग्नि होती है , न अग्नि नज़र आती है , ही उस अग्नि से हम फ़ायदा उठा सकते हैं । जिसContinue reading “राम कहा हैं?”

करना क्या है? कर क्या रहे है?

धंधै धावत जग बाधिआ ना बूझै वीचार ॥ जमण मरण विसारिआ मनमुख मुगध गवार ॥ गुरु साहिब फ़रमाते हैं कि हम मनमुख हैं , मुगध हैं , गँवार हैं कि हम हमेशा पेट के धंधों में ही दिन – रात भटकते फिरते हैं । जिस मक़सद के लिए परमात्मा ने हमें यहाँ भेजा है उसकेContinue reading “करना क्या है? कर क्या रहे है?”

🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️

संतों महात्माओं के उपदेश का आदर करो और खुद को पहचानों आप क्या हो और क्या कर रहे हो ?एक भिखारी था । उसने सम्राट होने के लिए कमर कसी और चौराहे पर अपनी फटी-पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हाँडी रख दी और सुबह-दोपहर-शाम भीख माँगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था। लेकिनContinue reading “🧘🏽‍♂️बाहर नहीं अंदर खोजें🧘🏽‍♂️”

ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार

उपनिषदों के अनुसार जप – तप , दान – पुण्य और धर्मग्रंथों के पठन – पाठन में परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती । उसे केवल ध्यान – साधना द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त किया जा सकता है । न चक्षुधा गृहाते नापि वाचा नान्यैर्देवैः तपसा कर्मणा वा । ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्त्वः ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानःContinue reading “ध्यान – साधना का लक्ष्यः आत्म – साक्षात्कार”

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