पक्षी का प्रभुप्रेम

प्रेम और नम्रता के साथ प्रभु से दिल लगाओ । … प्रभु और केवल प्रभु को पाने की सच्ची तड़प ही काफ़ी है क्लाउड ऑफ़ अननोइंग एक फ़कीर था जो अपने आप को पैगंबर समझता था । एक बार उसके मन में ख़याल आया कि मैं पैगंबर हूँ , ख़ुदा मुझसे खुश है ; मुझसेContinue reading “पक्षी का प्रभुप्रेम”

प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी

मनुष्य अपनी विपत्तियों को निमंत्रण देता है और फिर इन दुःखदायी अतिथियों के प्रति विरोध प्रकट करता है , क्योंकि वह भूल जाता है कि उसने कैसे , कब और कहाँ उन्हें निमंत्रण पत्र लिखे तथा भेजे थे । परंतु समय नहीं भूलता ; समय उचित अवसर पर हर निमंत्रण – पत्र ठीक पते परContinue reading “प्रभु की इच्छा या इंसान की मरज़ी”

हीरे का मोल

आठ गांठ कोपीन के , साधु न मानै शंक । नाम अमल माता रहै , गिनै इंद्र को रंक । कबीर साहिब मेवाड़ की रानी मीराबाई पंद्रहवीं शताब्दी के मशहूर संत गुरु रविदास जी की शिष्या थीं । उनकी सखियाँ – सहेलियाँ गुरु रविदास जी पर नाक – मुँह चढ़ाती थीं । वे मीराबाई कोContinue reading “हीरे का मोल”

गड़रिये की भेंट

वे लोग धन्य हैं जिनका मन पवित्र है , क्योंकि केवल उन लोगों को ही प्रभु का दीदार हासिल होगा । सेंट मैथ्यू मनुष्य के अंदर दो बड़े गुण हैं । एक भय और दूसरा भाव यानी डर और प्यार । जिसको परमात्मा का डर है , उसको परमात्मा से प्यार भी है । जिसकोContinue reading “गड़रिये की भेंट”

पैगंबर और उसके शिष्य

जब लग मेरी मेरी करै । तब लग काज एक नही सरै ॥ जब मेरी मेरी मिट जाए । तब प्रभ काज सवारह आए ॥ कबीर साहिब एक बार हज़रत मुहम्मद साहिब अपने दोस्तों और इमामों को मसजिद में ले गये और पूछा , ‘ आपके पास क्या – क्या है ? ‘ हज़रत उमरContinue reading “पैगंबर और उसके शिष्य”

एक घड़ी की संगति

गोबिंद जीउ सतसंगत मेल हर धिआईऐ । गुरु रामदास एक साहूकार का नियम था कि वह अपने असामियों से सूद – दर – सूद लिया करता था । एक दिन वह एक गाँव में किसी ग़रीब किसान के घर अपने पैसों की वसूली करने गया । ब्याज कम करने के लिए किसान ने बहुत ज़ोरContinue reading “एक घड़ी की संगति”

जाति- पाति आध्यात्म की नजर से

संतो महात्माओं ने हमेशा से एकता का उपदेश दिया है। वे हमको हर प्रकार के द्वैत से ऊपर उठकर समदर्शी बनने का उपदेश देते है। संत महात्मा समझाते है कि परमात्मा ने सब इंसान एक जैसे बनाए है। मजहब, मुल्क, कोम, नस्ल और जाति पाति के सब तरह के भेद भाव इंसान के बनाए हुएContinue reading “जाति- पाति आध्यात्म की नजर से”

मालिक सब देखता है

ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहाँ जाऊँ ? तेरी हुजूरी से भागकर कहाँ जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ , तू वहाँ भी मौजूद है । यदि पाताल में अपना डेरा तान लूँ तो तू वहाँ भी है ।129 साम्ज़ किसी महात्मा के पास दो आदमीContinue reading “मालिक सब देखता है”

संतों के सामने घमंड

होह सभना की रेणुका तउ आउ हमारे पास ॥131 गुरु अर्जुन देव शेख़ फ़रीद को बहुत कम आयु में ही रूहानियत की गहरी लगन थी । उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम सुना हुआ था जो राजस्थान के एक शहर अजमेर में रहते थे । उनसे दीक्षा लेने जब वे अजमेर पहुँचे तो देखा किContinue reading “संतों के सामने घमंड”

मुर्दा खाने का हुक्म

अपनी बुद्धि का सहारा न लेना बल्कि संपूर्ण मन से यहोवा ( प्रभु ) पर भरोसा रखना । उसी को याद करके सब काम करना , वह तेरा मार्गदर्शन करेगा ।42 प्रॉवर्बज़ एक बार गुरु नानक साहिब ने अपने सेवकों को मुर्दा खाने के लिए कहा । तो देखने में यह मुनासिब हुक्म नहीं थाContinue reading “मुर्दा खाने का हुक्म”

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