🌻मंजिल, मुसाफिर और सफ़र एक अनपढ़ गवांर आदमी जिसने कभी रेल्वे स्टेशन नही देखा हो और ना ही कभी ट्रेन का सफ़र तय किया हो ।और अगर उसे दिल्ली जाना हो तो वो पहले रेलवे स्टेशन आता है , अब बेचारा कभी ट्रेन में सफ़र तो किया नही , और स्टेशन पर इतनी सारी ट्रेनोंContinue reading “मंजिल, मुसाफिर और सफ़र”
Tag Archives: परमार्थी साखियां
तू सच में बहुत दयालु हैं!
एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शनContinue reading “तू सच में बहुत दयालु हैं!”
डल्ला की परीक्षा
मैं तेरी चितौनियों में उलझा हुआ हूँ , हे प्रभु ! मुझे शर्मिंदा न होने दे । जब तू मेरी सूझ बढ़ायेगा , तब मैं तेरे हुक्म अनुसार चलूँगा । साम्ज़ ज़िक्र है कि मुसलमानों की हुकूमत के दिनों में एक ऐसा समय आया जब गुरु गोबिन्द सिंह जी को मजबूरन आनन्दपुर छोड़ना पड़ा ।Continue reading “डल्ला की परीक्षा”
किसका सेवक ?
कुटुम्ब परिवार मतलब का । बिना धन पास नहिं आई।।स्वामी जी महाराज गुरु गोबिन्द सिंह जी का दरबार लगा हुआ था । सिक्खी का मज़मून चल रहा था । गुरु साहिब ने कहा कि गुरु का शिष्य कोई – कोई है , बाक़ी सब अपने मन के गुलाम हैं या स्त्री और बच्चों के गुलामContinue reading “किसका सेवक ?”
ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?
एक महात्मा के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला,’महाराज, मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए।’महात्मा बोले,–‘तुम्हें इस संसार में कौन सी चीजेंContinue reading “ईश्वर के दर्शन क्यो नहीं होते ?”
दुनिया के राज्य का मोल
गुरु से गुरु की ही माँग कीजिये , क्योंकि जब वह आपको यह बख्रिशश कर देते हैं तो फिर उनके साथ ही सारी चीजें मिल जाती हैं । महाराज सावन सिंह इब्राहीम अधम ने वर्ष अपने सतगुरु कबीर साहिब के चरणों में रहकर सेवा की और फिर उनका आशीर्वाद प्राप्त करके उनकी आज्ञा लेकर आपContinue reading “दुनिया के राज्य का मोल”
भाई सुथरा और महात्मा की आग
– क्रोध में रूह फैलती है । जब क्रोध करो , आँखें लाल सुर्ख हो जाती हैं । रोम – रोम खड़ा हो जाता है , चेहरा और ही हो जाता है । यहाँ तक कि आदमी अक्ल से बेबहरा हो जाता है यानी संतुलन खो बैठता है । महाराज सावन सिंह गुरु अर्जुन साहिबContinue reading “भाई सुथरा और महात्मा की आग”